हर लड़की अपनी शादी को लेकर आँखों में ढेरों हसीन सपने संजोती है। वह सोचती है कि नए घर में उसे एक जीवनसाथी मिलेगा, जो सुख-दुख में उसका साथ देगा और एक खुशहाल परिवार की नींव रखेगा। लेकिन उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली एक पीड़ित युवती के लिए शादी का यह खूबसूरत सफर पहले ही दिन से एक खौफनाक दुःस्वप्न में बदल गया। पीड़िता का आरोप है कि जिस पवित्र रिश्ते को उसने सात फेरों और अटूट वादों के साथ अपनाया था, उसमें उसे न तो पति का प्यार मिला, न सम्मान और न ही एक पत्नी होने का बुनियादी अधिकार। साल 2021 में 19 नवंबर को उसकी शादी लखनऊ के पॉश इलाके महानगर के रहने वाले एक युवक के साथ बड़ी धूमधाम से हुई थी। लड़की के मायके वालों ने अपनी हैसियत से बढ़कर इस शादी में करीब 15 लाख रुपये पानी की तरह बहाए थे ताकि उनकी बेटी खुश रहे। लेकिन ससुराल पहुंचते ही दुल्हन की खुशियों को ग्रहण लग गया। उसे बुनियादी जरूरतों के सामान के लिए भी तरसाया जाने लगा और ससुराल वालों का बर्ताव दिन-ब-दिन बेहद रूखा और प्रताड़ना से भरा होता चला गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि शादी के पहले दिन से ही पति ने उससे दूरी बना ली और शारीरिक संबंध बनाने से कतराता रहा।
इलाज के नाम पर दो साल तक मिला सिर्फ दिलासा, जब डॉक्टर के पास पहुंचे तो खुला सच
समय बीतता गया और हर दिन पीड़ित पत्नी इस आस में चुप रही कि शायद आज नहीं तो कल सब कुछ ठीक हो जाएगा। जब भी वह अपने पति के इस अजीबोगरीब व्यवहार और दूरी बनाए रखने के पीछे की वजह पूछती, तो पति बेहद चालाकी से उसे टाल देता। वह हर बार यही बहाना बनाता कि उसकी कोई गुप्त बीमारी का इलाज चल रहा है और जैसे ही दवाओं का यह कोर्स पूरा होगा, उनका वैवाहिक जीवन सामान्य हो जाएगा। इसी झूठी उम्मीद और दिलासे के सहारे करीब दो साल का लंबा वक्त कट गया, लेकिन हालात रत्ती भर भी नहीं बदले। आखिरकार, पत्नी का सब्र का बांध टूट गया और उसे अपने पति पर गहरा शक होने लगा। सच जानने के लिए वह अपने पति को लेकर एक निजी अस्पताल पहुंची। वहां जब डॉक्टरों ने पति की शारीरिक स्थिति को समझने के लिए उसकी जांच शुरू की और जांच के हिस्से के रूप में ‘स्पर्म सैंपल’ (Sperm Sample) देने को कहा, तो पति के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। उसने डॉक्टरों के सामने साफ तौर पर स्पर्म सैंपल देने से मना कर दिया और अस्पताल से भाग खड़ा हुआ। पति की इस घबराहट और सैंपल देने से सीधे इनकार ने पत्नी के उस शक को यकीन में बदल दिया कि उसका पति कोई बड़ी बात छुपा रहा है।
ससुराल वालों का नया खेल: ‘5 लाख लाओ, तभी कराएंगे बेटे का इलाज’, और फिर…
अस्पताल के इस ड्रामे के बाद जब पीड़ित महिला ने घर आकर इस बात पर आपत्ति जताई और पति का मुकम्मल इलाज कराने की जिद की, तो कहानी में एक नया और खौफनाक मोड़ आ गया। बीमारी का सच छुपाने और बहू को ढांढस बंधाने के बजाय ससुराल वालों ने उलटा उसी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। सास, देवर और ननद ने मिलकर पीड़ित महिला के सामने एक नई और नाजायज मांग रख दी। उनसे साफ तौर पर कह दिया गया कि यदि वह अपने पति का इलाज आगे जारी रखना चाहती है, तो उसे अपने मायके से 5 लाख रुपये कैश मंगवाने होंगे। ससुराल वालों ने दोटूक शब्दों में कहा कि ‘पहले मायके से पांच लाख रुपये लेकर आओ, तभी तुम्हारे पति का इलाज आगे बढ़ेगा।’ जब पीड़िता ने इस नाजायज मांग और प्रताड़ना का विरोध किया, तो ससुराल वालों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने न केवल उसे घर में रखने से इनकार कर दिया, बल्कि उसके साथ बेरहमी से मारपीट की और उसे जबरन घर से बाहर निकाल दिया। इस तरह एक बेकसूर लड़की को बिना किसी गलती के सड़क पर आने को मजबूर कर दिया गया।
गोरखनाथ थाने पहुंची पीड़ित पत्नी, पुलिस ने पति समेत 5 आरोपियों पर कसा शिकंजा
हर तरफ से निराश और अपनों से ठगी गई पीड़िता ने आखिरकार इस जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया। वह न्याय की गुहार लेकर गोरखपुर के गोरखनाथ थाने पहुंची। पीड़िता ने पुलिस को अपनी दर्दभरी दास्तां सुनाई और 12 जुलाई की शाम करीब 5 बजे लिखित तहरीर देकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता के बयानों और प्राथमिक सबूतों के आधार पर तत्परता दिखाते हुए पति, सास, देवर और ननद समेत ससुराल पक्ष के कुल पांच लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना और अन्य संबंधित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। इस पूरे संवेदनशील मामले पर बात करते हुए गोरखनाथ थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह ने बताया कि पीड़िता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस मामले के हर पहलू की बेहद बारीकी से जांच कर रही है। कानून के मुताबिक जो भी तथ्य और सबूत सामने आएंगे, उसी के आधार पर आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस की टीमें मामले की तह तक जाने और सच का पता लगाने में जुटी हुई हैं।
