भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर दिया है। इस नई कार्यसमिति में कुल 65 सदस्यों में से 12 महिलाओं को जगह मिली है, जो कुल हिस्सेदारी का लगभग 18 फीसदी हिस्सा है। पार्टी के इस संगठनात्मक बदलाव में वरिष्ठ महिला नेताओं की वापसी और नई चेहरों की ताजगी को शामिल किया गया है, जिससे आने वाले चुनावी महीनों में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।
सांगठनिक ढांचे में महिलाओं का बढ़ता कद और रणनीतिक पैंतरा
भारतीय राजनीति में महिला मतदाताओं की बढ़ती संख्या और उनकी निर्णायक भूमिका को देखते हुए बीजेपी ने अपनी नई टीम में जेंडर रिप्रेजेंटेशन पर विशेष जोर दिया है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के कुल 13 पदों में से 6 पदों पर महिलाओं को नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर मुख्य संगठनात्मक ढांचे में उनकी जोरदार वापसी कराई गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सिर्फ एक रूटीन फेरबदल नहीं है, बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों और दूरगामी राजनीतिक समीकरणों को साधने की एक सोची-समझी रणनीति है।
दिग्गजों की वापसी और प्रमुख चेहरों को अहम जिम्मेदारी
नई टीम में देश की कई दिग्गज महिला नेत्रियों को प्रमुख कमान सौंपी गई है। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को एक बार फिर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है, जिससे हिंदी बेल्ट में पार्टी की पकड़ मजबूत बनी रहे। इनके अलावा आंध्र प्रदेश से डी. पुरंदेश्वरी, उत्तर प्रदेश से रेखा वर्मा, गुजरात से वर्षाबेन दोषी, महाराष्ट्र से डॉ. भारती प्रवीण पवार और पश्चिम बंगाल से डॉ. मधुलचंद्र कर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, मध्य प्रदेश से कविता पाटीदार, नागालैंड की पहली महिला राज्यसभा सांसद फांगनोन कोन्याक और उत्तर प्रदेश से संगीता यादव को राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किया गया है।
मोर्चा और सोशल मीडिया प्रबंधन में नए चेहरों का आगाज
पार्टी के मोर्चों और विंग्स में भी बदलाव करते हुए छत्तीसगढ़ की नेता रूप कुमारी चौधरी को बीजेपी महिला मोर्चा का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। उनके कंधों पर उस समय महिला विंग की कमान आई है जब कई राज्यों में महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। इसके अलावा, लंबे समय से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर महिला मोर्चा की कमान संभाल रही प्रीति गांधी को राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह-संयोजक (Co-Convenor) नियुक्त किया गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और जमीनी स्तर पर महिलाओं की यह दोहरी सक्रियता पार्टी के प्रचार तंत्र को और अधिक धार देगी।
चुनावी साल 2027 और भविष्य की राजनीतिक दिशा
यह पूरा संगठनात्मक फेरबदल ऐसे समय में हुआ है जब साल 2027 कई राज्यों के लिए चुनावी साल साबित होने वाला है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों से नए और प्रभावी चेहरों को शामिल करके पार्टी ने क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की है। बहरहाल, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि संगठन के नक्शे पर आई यह ‘वुमेन पावर’ जमीन पर कितना असर दिखा पाती है और पार्टी की चुनावी वैतरणी पार कराने में कितनी मददगार साबित होती है।
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