पश्चिम बंगाल की दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों, नंदीग्राम और रेजीनगर, पर उपचुनाव के लिए आज सुबह से ही वोटिंग प्रक्रिया जारी है। इस बीच मुर्शिदाबाद जिले से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को पुलिस ने उनके पार्टी ऑफिस से हिरासत में ले लिया है। इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद से इलाके का सियासी पारा काफी चढ़ गया है और तृणमूल कांग्रेस तथा विपक्षी दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
गिरफ्तारी पर भड़के हुमायूं कबीर, लगाए गंभीर आरोप
पुलिस हिरासत में जाने से पहले विधायक हुमायूं कबीर ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए प्रशासन पर तीखे हमले किए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पुलिस खुद चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी पैदा करने की कोशिश कर रही है। उनका आरोप था कि सत्ता के दबाव में आकर कानून-व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है ताकि उनके समर्थकों को डराया जा सके। हालांकि, पुलिस अधिकारियों की ओर से अभी तक इस बात की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है कि उन्हें किन विशिष्ट धाराओं या कारणों के तहत हिरासत में लिया गया है।
ममता बनर्जी के लिए साख का सवाल बनीं ये सीटें
बता दें कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी के लिए यह उपचुनाव किसी कड़ी परीक्षा से कम नहीं है। खास तौर पर नंदीग्राम और रेजीनगर सीट पर हो रहा यह मुकाबला तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक साख से जुड़ा हुआ है। एक तरफ जहां सत्ताधारी पार्टी अपनी खोई जमीन को मजबूत करने की जुगत में है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी इन सीटों पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरा जोर लगा रही है। इस हाई-प्रोफाइल चुनावी माहौल के बीच हुमायूं कबीर की गिरफ्तारी ने मुकाबले को और अधिक रोमांचक बना दिया है।
असम और तमिलनाडु में भी चुनावी सरगर्मी तेज
सिर्फ पश्चिम बंगाल ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी उपचुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल चरम पर है। पश्चिम बंगाल के अलावा आज असम और तमिलनाडु की कुल सीटों पर भी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। तमिलनाडु की दो सीटों पर हो रहे इस उपचुनाव पर भी पूरे दक्षिण भारत की नजरें टिकी हुई हैं। बहरहाल, बंगाल के रेजीनगर में हुए इस ताजा घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिस पर हर किसी की पैनी नजर बनी हुई है।
