बिहार की राजनीति में जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (पीके) ने एक बार फिर अपने बयानों से सियासी पारा गरमा दिया है। हाल ही में उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव, देश को झकझोरने वाले नीट (NEET-UG) परीक्षा पेपर लीक मामले और पटना के चर्चित खान सर कोचिंग सेंटर फायरिंग केस पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी। पीके ने जहाँ एक तरफ कोचिंग सेंटर विवाद से दूरी बनाई, वहीं दूसरी तरफ देश की शिक्षा व्यवस्था और बिहार की सत्ताधारी पार्टी पर तीखे तीर चलाए। उनके इस नए तेवर से राज्य में राजनीतिक सरगर्मी अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
बांकीपुर उपचुनाव: बीजेपी के लिए अग्निपरीक्षा या जनता का जनमत संग्रह?
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सीधे निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि बांकीपुर का यह उपचुनाव महज किसी एक विधानसभा क्षेत्र का आम चुनाव नहीं है, बल्कि यह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की प्रतिष्ठा से जुड़ी सीट है। पीके ने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि पिछले 40 सालों में बांकीपुर में बीजेपी को कोई भी दल या नेता हरा नहीं पाया है। लेकिन इस बार परिस्थितियां बदल चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नवंबर 2025 में एनडीए ने राज्य की जनता को 10-10 हजार रुपये देकर, भ्रमित कर और झूठे वादे करके अपनी सरकार बनाई है। पीके ने तंज कसते हुए कहा कि बिहार के इतिहास में पहली बार बीजेपी का कोई नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठा है, इसलिए इस चुनाव के मायने बेहद खास हैं।
वादों की कसौटी और सरकार को घेरने की जन सुराज की रणनीति
प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के इस दंगल को सरकार के कामकाज पर एक बड़ा जनमत संग्रह (रेफरेंडम) करार दिया है। उनका मानना है कि यह चुनाव तय करेगा कि जनता सरकार के दावों से कितनी संतुष्ट है। पीके ने कहा कि चुनाव के दौरान जनता से जो बड़े-बड़े वादे किए गए थे—चाहे वह हर परिवार को 2 लाख रुपये देने की बात हो, बिहार से पलायन रोकने का दावा हो, या फिर राज्य की जर्जर शिक्षा और रोजगार व्यवस्था को पटरी पर लाने का भरोसा हो—अब समय आ गया है कि जनता इन वादों पर अपना फैसला सुनाए। उन्होंने साफ किया कि जन सुराज पूरी ताकत के साथ बांकीपुर का चुनाव लड़ेगा। पीके ने हुंकार भरते हुए कहा कि एनडीए ने बिहार में बदलाव की उम्मीद रखने वाले लोगों और जन सुराज के साथ जो धोखा किया है, उसका करारा जवाब बांकीपुर में बीजेपी को हराकर दिया जाएगा।
NEET पेपर लीक पर बड़ा दावा: ‘जब तक कोचिंग हावी रहेंगे, तब तक पेपर लीक होते रहेंगे’
देशभर के छात्रों से जुड़े नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले पर प्रशांत किशोर ने बेहद कड़ा और नीतिगत रुख अपनाया। उन्होंने इसे कोई अकेली घटना मानने से इनकार करते हुए इसे एक बड़ी व्यवस्थागत बीमारी बताया। पीके ने सीधे तौर पर कोचिंग संस्थानों के बढ़ते जाल को इस धांधली का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 से 15 सालों में देश के भीतर कोचिंग माफिया का दबदबा इस कदर बढ़ गया है कि वे नए छात्रों को अपने यहाँ खींचने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। पीके ने चेतावनी दी कि दो साल पहले भी नीट का पेपर लीक हुआ था, अब फिर हुआ है और आगे भी होता रहेगा। जब तक सरकार इस पूरी शिक्षा व्यवस्था से कोचिंग संस्थानों के बेजा प्रभाव को खत्म नहीं करेगी, तब तक सरकार के सारे दावे खोखले साबित होंगे।
खान सर फायरिंग केस पर पीके का यू-टर्न: ‘मैं इस मामले का एक्सपर्ट नहीं हूँ’
वहीं दूसरी तरफ, पटना के मशहूर शिक्षक खान सर के कोचिंग सेंटर पर हुई फायरिंग और उनके खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर (FIR) के मामले पर प्रशांत किशोर ने पूरी तरह से दूरी बना ली। खान सर की संभावित गिरफ्तारी और विवाद से जुड़े सवाल पर पीके ने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा कि यह पूरी लड़ाई कोचिंग संस्थान चलाने वाले लोगों के बीच का आपसी विवाद और आपसी झगड़ा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैं इस क्षेत्र का विशेषज्ञ नहीं हूँ और न ही मुझे इस पूरे घटनाक्रम की बारीकियों के बारे में कोई पुख्ता जानकारी है। इसलिए आधी-अधूरी जानकारी के आधार पर मैं इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।” पीके के इस बयान से साफ है कि वे खुद को किसी स्थानीय व्यावसायिक गुटबाजी के विवाद में नहीं घसीटना चाहते।
