नीट (NEET) पेपर लीक को लेकर देश का सियासी पारा अब अपने चरम पर पहुंच गया है। देर रात अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाते हुए पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई का वादा किया। पीएम मोदी ने बताया कि अधिकारियों ने दोषियों को त्वरित सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का एक पूरा ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जिस पर कैबिनेट की बैठक में मुहर लगनी बाकी है। उन्होंने इस मुद्दे पर कड़ा कानून बनाने की बात भी कही। हालांकि, आधी रात को जारी हुए इस वीडियो ने शांत पड़ी सियासत में एक बार फिर चिंगारी सुलगा दी है। विपक्ष इसे सरकार की नाकामी छिपाने का जरिया बता रहा है।
‘संसद के बाहर एकतरफा मन की बात क्यों?’ विपक्ष का तीखा प्रहार
प्रधानमंत्री का यह वीडियो सामने आते ही कांग्रेस नेतृत्व ने आक्रामक रुख अपना लिया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर पीएम मोदी को सीधे निशाने पर लिया। खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि जब देश की संसद का सत्र चल रहा हो, तो देश के प्रधानमंत्री को संसद के पटल पर आकर बयान देना चाहिए, न कि रात के अंधेरे में एकतरफा वीडियो जारी करके अपनी ‘मन की बात’ रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार संसद का सामना करने से डर रही है और छात्रों के भविष्य से जुड़े इतने संवेदनशील मुद्दे को महज एक वीडियो संदेश तक सीमित कर रही है।
‘धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त करके ही संसद आइए’, खरगे की सीधी चेतावनी
हमले को और तेज करते हुए खरगे ने प्रधानमंत्री के सामने बेहद कड़े शब्दों में शर्तें रख दी हैं। उन्होंने पीएम मोदी को टैग करते हुए कहा कि अगर वे संसद में आने का साहस जुटा रहे हैं, तो सबसे पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से बर्खास्त करके आएं। इसके साथ ही खरगे ने राहुल गांधी की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को सबसे पहले देश के लाखों पीड़ित छात्रों और उनके अभिभावकों से खुलकर माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने उन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर भी सख्त कार्रवाई की मांग की, जिन्होंने हक मांग रहे छात्रों पर लाठियां चलाईं और पेलेट गन का इस्तेमाल कर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की।
कैबिनेट बैठक पर टिकी नजरें, क्या सदन में हो पाएगी चर्चा?
विपक्ष के इस आक्रामक रुख के बाद अब सारा दारोमदार आगामी कैबिनेट बैठक और संसद की कार्यवाही पर टिक गया है। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री फास्ट ट्रैक कोर्ट और नए बिल को पारित कराने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और पीएम की माफी नहीं होती, तब तक शिक्षा व्यवस्था पर किसी भी विस्तृत चर्चा का सवाल ही पैदा नहीं होता। संसद में इस गतिरोध के चलते कामकाज ठप होने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या सरकार विपक्ष की इन भारी मांगों के आगे झुकती है या फिर संसद के भीतर इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा देखने को मिलता है।
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