देशभर में चर्चा का विषय बने NEET-UG पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली सुनवाई सोमवार को होनी थी, लेकिन सुनवाई शुरू होने से पहले ही मामला आगे बढ़ गया। इस केस को तेजी से निपटाने के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई गई थी, जिससे छात्रों को जल्द न्याय मिल सके। हालांकि, सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से कोई वकील अदालत में मौजूद नहीं था। इसी वजह से कोर्ट ने कार्यवाही आगे बढ़ाने के बजाय अगली तारीख तय करने का फैसला लिया। अब इस मामले की सुनवाई 3 अगस्त को दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से नियुक्त लोक अभियोजक की मौजूदगी अनिवार्य होगी, ताकि सुनवाई बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके।
जमानत याचिका पर नहीं हो सकी बहस
सोमवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट में गिरफ्तार आरोपियों बिकास बिवाल और दिनेश बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। दोनों उन 13 आरोपियों में शामिल हैं जिन्हें CBI ने NEET पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया है। आरोपियों की ओर से उनके वकील ए.पी. सिंह अदालत में मौजूद थे और सुनवाई के लिए तैयार थे, लेकिन जांच एजेंसी की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा। इसके बाद स्पेशल जज अनु ग्रोवर बलीगा ने मामले की सुनवाई स्थगित करते हुए सरकार को तुरंत सरकारी वकील नियुक्त करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में सभी पक्षों की मौजूदगी जरूरी होगी ताकि मामले पर विधिवत सुनवाई की जा सके। फिलहाल आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में विचाराधीन हैं और अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आएगा।
पेपर लीक मामलों में तेजी लाने के लिए बनाई गई फास्ट ट्रैक कोर्ट
सरकार ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसे मामलों का जल्द निपटारा करने के उद्देश्य से फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था लागू की है। यह कदम पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 के तहत उठाया गया है। इन विशेष अदालतों में केवल परीक्षा से जुड़े अपराधों की सुनवाई की जाएगी, ताकि लंबे समय तक मामलों के लंबित रहने की समस्या खत्म हो सके। सरकार ने संसद में इस कानून को और सख्त बनाने के लिए संशोधन विधेयक भी पेश किया है। प्रस्तावित बदलावों के तहत पेपर लीक के दोषियों पर जुर्माना बढ़ाने और अधिकतम 10 साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा दोबारा मजबूत करना और नकल तथा पेपर लीक जैसे अपराधों पर सख्ती से रोक लगाना है।
देशभर में बना बड़ा मुद्दा, अब 3 अगस्त की सुनवाई पर नजर
NEET पेपर लीक विवाद ने पिछले कई महीनों से देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है। छात्रों और विभिन्न संगठनों ने परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कई स्थानों पर प्रदर्शन किए। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा और जवाब मांगा। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाई जाएंगी, ताकि दोषियों को जल्द सजा मिल सके और छात्रों का भरोसा कायम रहे। अब इस मामले में सभी की नजर 3 अगस्त को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी है। उम्मीद की जा रही है कि उस दिन अदालत में सभी पक्ष मौजूद रहेंगे और मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी। यह केस केवल एक परीक्षा से जुड़ा मामला नहीं रह गया है, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता से जुड़ा अहम मुद्दा बन चुका है।
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