बिहार में हाल ही के दिनों में हुए प्रदर्शनों और उसके बाद पुलिस द्वारा की जा रही ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। पटना, छपरा, बेगूसराय और सीतामढ़ी समेत कई जिलों में सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को चिन्हित कर जेल भेज रही है। इस दमनकारी कार्रवाई के सामने आने के बाद अब राजनीतिक दलों और संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस एक्शन को लेकर एनडीए सरकार को सीधी चेतावनी दी है।
CJP की दो टूक: ‘दिल्ली समझौते के भरोसे को न तोड़े सरकार, तुरंत वापस हों सभी मुकदमे’
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार को 25 जुलाई को हुए दिल्ली समझौते के तहत अपना वादा निभाना चाहिए। CJP ने अपनी पोस्ट में केंद्रीय नेताओं जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा दिए गए उस भरोसे का जिक्र किया है जिसमें प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी आपराधिक मामलों को वापस लेने की बात तय हुई थी। इस दल ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और बंगाल के नेता सुभेंदु अधिकारी को टैग करते हुए साफ शब्दों में कहा कि छात्रों और युवाओं के साथ हुए समझौतों को तोड़ना भारी पड़ सकता है। CJP ने देश भर की पुलिस से भी यह अपील की है कि वे दिल्ली में हुए समझौते का पालन करें और किसी भी छात्र के खिलाफ कठोर कार्रवाई न करें।
तेजस्वी यादव का तीखा हमला: ‘फर्जी मुकदमों और पुलिस प्रताड़ना का उठाया कड़ा विरोध’
बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी राज्य सरकार और प्रशासन के रवैये पर कड़ा एतराज जताया है। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट करते हुए सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि समझौते के बावजूद बिहार में हजारों निर्दोष छात्रों पर फर्जी केस दर्ज कर उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है, और उनके परिजनों को बेवजह प्रताड़ित किया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि छात्रों को तुरंत रिहा नहीं किया गया और इन झूठे मुकदमों को वापस नहीं लिया गया, तो यह मनमानी एनडीए सरकार को बहुत महंगी पड़ेगी। उन्होंने पुलिसिया कार्रवाई को लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया है।
दिल्ली समझौते की शर्तों पर बढ़ा विवाद: क्या मान ली गई थीं सारी मांगें?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि हाल ही में जब CJP की शीर्ष नेतृत्व जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ बैठक हुई थी, तब कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी थी। इस समझौते के तहत केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ-साथ घायलों व पीड़ितों को मुआवजा देने और देश भर में प्रोटेस्ट के दौरान दर्ज किए गए सभी मुकदमों को रद्द करने की बात तय हुई थी। यह दावा किया जा रहा है कि आंदोलन के शांत होने और शर्तों के माने जाने के बाद भी विभिन्न राज्यों में पुलिस द्वारा छात्रों की धरपकड़ जारी है, जिसके कारण अब एक बार फिर से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर टकराव के हालात पैदा हो गए हैं।
