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कीचड़ में तड़पती माँ, सड़क पर जन्मी बेटी: एंबुलेंस की लापरवाही ने जगाई इंसानियत का सवाल

Mirzapur में दिल दहला देने वाली घटना — एंबुलेंस ड्राइवर ने गर्भवती महिला को ‘कीचड़’ का बहाना बनाकर हाईवे पर उतार दिया।

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UP News: एक ऐसा मंजर जिसने न सिर्फ प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि इंसानियत की बुनियाद को भी हिला दिया। मिर्जापुर जिले में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान एंबुलेंस ड्राइवर ने हाईवे पर उतार दिया। यह घटना न केवल दिल दहला देने वाली है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

रात के अंधेरे में, जब एक महिला अस्पताल पहुँचने की उम्मीद में दर्द से कराह रही थी, तब एंबुलेंस चालक ने यह कहकर रास्ता रोक दिया—“आगे कीचड़ बहुत है, नहीं जा सकता।” इसके बाद जो हुआ, उसने हर देखने वाले को अंदर तक झकझोर दिया।

कीचड़ का बहाना, जिंदगी का इम्तिहान

घटना मिर्जापुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) बरौंधा की बताई जा रही है। कोठी खुर्द गाँव के अतीक अहमद ने रात करीब दो बजे 102 एंबुलेंस सेवा को फोन किया। उनकी पत्नी अरवी बानो प्रसव पीड़ा से कराह रही थीं। परिजनों को भरोसा था कि सरकारी एंबुलेंस उन्हें समय पर अस्पताल पहुँचा देगी, लेकिन हकीकत इससे कहीं ज़्यादा भयावह निकली।

अतीक का आरोप है कि एंबुलेंस कर्मियों ने मुश्किल से आधे घंटे की दूरी तय करने में डेढ़ घंटे लगाए। रास्ते में चालक ने कई बार गाड़ी रोकी और आखिर में कहा कि आगे कीचड़ होने के कारण वह नहीं जा सकता। उसने अरवी बानो को हाईवे किनारे ही उतार दिया और वहां से चला गया।

मजबूर पति और घरवालों ने सड़क किनारे ही महिला को बिठाया। आसपास के लोगों की मदद से एक चादर बिछाई गई। किसी के पास मेडिकल सुविधा नहीं थी, फिर भी परिवार ने वहीं कीचड़ में बच्ची को जन्म दिलाया। मोबाइल से बनाया गया वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो पूरा स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया।

वायरल वीडियो से मचा हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग में जवाबदेही पर उठे सवाल

वीडियो सामने आते ही प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। मिर्जापुर के सीएमओ ने कहा कि प्रथम दृष्टया एंबुलेंस कर्मियों की लापरवाही साफ दिख रही है और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या हर बार कार्रवाई के बाद भी ऐसी घटनाएँ दोहराई जाएंगी?

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में उस क्षेत्र की सड़कें कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं, लेकिन यह कोई कारण नहीं बन सकता कि किसी गर्भवती महिला को बीच रास्ते पर छोड़ दिया जाए। “सरकारी एंबुलेंस तो उम्मीद की आखिरी किरण होती है, अगर वही बुझ जाए तो आम आदमी जाए कहाँ?” — यह सवाल अब पूरे जिले में गूंज रहा है।

सोशल मीडिया पर लोग सरकार और स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांग रहे हैं। वहीं, अरवी बानो और उनकी नवजात बेटी फिलहाल सुरक्षित हैं और अस्पताल में भर्ती हैं। लेकिन इस घटना ने जो ज़ख्म छोड़े हैं, वे शायद लंबे समय तक नहीं भर पाएंगे।

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