अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू करने के फैसले के बाद ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। यह फैसला उस समय लिया गया जब इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच हुई शांति वार्ता बेनतीजा रही। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों पर निगरानी और रोक लगाने का ऐलान किया, जिससे खाड़ी क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है। इस कदम को लेकर ईरान ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया है और कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराया है।
ईरानी नेता की अमेरिका को सीधी धमकी
ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व से जुड़े वरिष्ठ सलाहकार और पूर्व सैन्य अधिकारी मोहसिन रेजाई ने अमेरिका को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी जहाजों की गतिविधि बढ़ती है, तो उन्हें निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि “अगर अमेरिका खुद को इस इलाके का ‘पुलिस अधिकारी’ समझता है, तो यह उसकी बड़ी भूल है। हमारे पास ऐसी मिसाइलें हैं जो पहले ही हमले में उनके जहाजों को तबाह कर सकती हैं।” रेजाई के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है।
सीजफायर और बातचीत पर असमंजस
हाल ही में दोनों देशों के बीच संभावित सीजफायर और शांति वार्ता को लेकर चर्चा हो रही थी, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने स्थिति को और उलझा दिया है। रेजाई ने साफ कहा कि वह युद्धविराम बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं, कैरोलिन लीविट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने किसी भी औपचारिक सीजफायर विस्तार का अनुरोध नहीं किया है। उन्होंने कहा कि नाकेबंदी पूरी तरह लागू की जा चुकी है और यह केवल ईरान ही नहीं, बल्कि उस क्षेत्र से गुजरने वाले सभी जहाजों पर प्रभाव डालती है। इससे यह साफ हो गया है कि दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है और हालात फिलहाल सामान्य होने के संकेत नहीं दे रहे।
खाड़ी में अमेरिकी सैन्य हलचल तेज
अमेरिकी नौसेना इस समय ओमान की खाड़ी और आसपास के इलाकों में लगातार गश्त कर रही है, जबकि सेंटकॉम नाकेबंदी को सख्ती से लागू करने में जुटा है। होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई गुजरती है, ऐसे में यहां किसी भी टकराव का असर वैश्विक बाजार पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीतिक प्रयास फिर से शुरू होंगे या यह तनाव किसी बड़े संघर्ष में बदल सकता है।
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