Homeदेशपेट्रोल-डीजल के बाद अब दालों की कीमतें बढ़ीं, आम जनता परेशान

पेट्रोल-डीजल के बाद अब दालों की कीमतें बढ़ीं, आम जनता परेशान

देश में पेट्रोल-डीजल के बाद अब दालों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ी। ट्रांसपोर्ट खर्च और मौसम की मार से अरहर-उड़द दाल महंगी हुई, रसोई का बजट बिगड़ा।

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देश में महंगाई का दबाव अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। पहले पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों ने बजट बिगाड़ा, और अब दालों की कीमतों में तेजी ने स्थिति और मुश्किल कर दी है। बाजार में अरहर, उड़द और अन्य दालों के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं, जिससे आम उपभोक्ता परेशान हैं। दुकानदारों के अनुसार पिछले कुछ हफ्तों में दालों की कीमतों में लगातार इजाफा देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर घरेलू खर्च पर पड़ रहा है।

ईंधन महंगा होने से बढ़ा ट्रांसपोर्ट खर्च, सप्लाई पर पड़ा असर

दालों की कीमत बढ़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण ट्रांसपोर्टेशन लागत में वृद्धि बताई जा रही है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद माल ढुलाई महंगी हो गई है। ट्रकों का किराया बढ़ने से मंडियों से दुकानों तक सामान पहुंचाने की लागत भी बढ़ गई है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की मजबूती ने भी आयात लागत को प्रभावित किया है। इसका सीधा असर दालों की सप्लाई चेन पर पड़ा है, जिससे बाजार में दाम ऊपर जा रहे हैं।

मौसम की मार और फसल नुकसान ने बढ़ाई समस्या

बेमौसम बारिश और अल-नीनो जैसी मौसमीय परिस्थितियों के कारण देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। खासकर अरहर और उड़द जैसी दालों की पैदावार प्रभावित हुई है। उत्पादन कम होने और मांग अधिक रहने से बाजार में दाम बढ़ते जा रहे हैं। किसानों की फसल प्रभावित होने से सप्लाई में कमी आई है, जिसका सीधा असर थोक और खुदरा बाजार पर दिखाई दे रहा है।

अरहर दाल सबसे ज्यादा महंगी, बाजार में 12% तक उछाल

थोक बाजार के आंकड़ों के अनुसार अरहर दाल की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी देखी जा रही है। बताया जा रहा है कि इसकी कीमतों में करीब 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और यह 9000 से 12250 रुपये प्रति क्विंटल के बीच पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश की मंडियों में इसका औसत भाव लगभग 10440 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि कुछ बड़े बाजारों जैसे सिलीगुड़ी में यह 11000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। भारत अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए म्यांमार और अफ्रीकी देशों से बड़ी मात्रा में दालों का आयात करता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय तनाव और समुद्री मालभाड़ा बढ़ने से आयात भी महंगा हो गया है। इसका सीधा असर आम लोगों की थाली पर पड़ रहा है और आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद कम दिखाई दे रही है।

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