दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सोनम वांगचुक के अनिश्चितकालीन अनशन ने अब राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। शिक्षा से जुड़े मुद्दों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक से मिलने गुरुवार को समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव पहुंचीं। उनके साथ पार्टी के कई सांसद और विधायक भी मौजूद रहे। जैसे ही डिंपल यादव मंच पर पहुंचीं, वहां मौजूद समर्थकों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। जंतर-मंतर का माहौल कुछ समय के लिए पूरी तरह राजनीतिक और आंदोलनकारी रंग में नजर आया। इस दौरान बड़ी संख्या में छात्र, युवा और समर्थक भी मौजूद रहे।
डिंपल यादव ने युवाओं से की खास अपील
सोनम वांगचुक से मुलाकात के बाद डिंपल यादव ने युवाओं को संबोधित करते हुए आंदोलन में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं है, बल्कि युवाओं के अधिकार, सम्मान और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने युवाओं से 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में बड़ी संख्या में शामिल होने का आग्रह किया। डिंपल यादव ने विश्वास जताया कि लोकतांत्रिक तरीके से उठाई गई आवाज का असर जरूर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के मुद्दों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और सरकार को उनकी चिंताओं पर ध्यान देना चाहिए। उनके इस बयान के बाद आंदोलन को लेकर नई राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है।
क्या 20 जुलाई को खत्म होगा अनशन?
आंदोलन के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि क्या सोनम वांगचुक 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त करेंगे। डिंपल यादव ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि वांगचुक उस दिन अपनी भूख हड़ताल खत्म कर सकते हैं। हालांकि इस पर अभी तक सोनम वांगचुक की ओर से कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। दूसरी ओर, आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि अंतिम फैसला वांगचुक खुद ही लेंगे। आंदोलन का समर्थन कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि डिंपल यादव ने वांगचुक से अनशन खत्म करने का अनुरोध किया है और भरोसा दिलाया है कि इसके बाद उनकी पार्टी संसद के अंदर इस मुद्दे को मजबूती से उठाएगी। हालांकि अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई स्पष्ट सहमति सामने नहीं आई है।
कई सांसद और विधायक भी पहुंचे
डिंपल यादव के साथ समाजवादी पार्टी के कई प्रमुख नेता और जनप्रतिनिधि भी जंतर-मंतर पहुंचे। इनमें विभिन्न लोकसभा क्षेत्रों के सांसद और विधायक शामिल रहे। नेताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि आंदोलन को विपक्षी दलों का समर्थन मिल रहा है। अब सभी की नजर 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च पर टिकी हुई है। आंदोलनकारी इसे अपनी मांगों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का बड़ा अवसर मान रहे हैं। वहीं राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर अपनी भूमिका तय करने में जुटे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और सरकार की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
