उत्तर प्रदेश सरकार ने जिला पंचायतों को लेकर बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के सभी 75 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 11 जुलाई 2026 को खत्म हो रहा है। इसके बाद नई जिला पंचायतों के गठन तक मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष ही प्रशासक के रूप में काम करेंगे। सरकार का कहना है कि यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि जिला पंचायतों का कामकाज बिना किसी रुकावट के चलता रहे। यह व्यवस्था अधिकतम छह महीने तक लागू रह सकती है या फिर नई जिला पंचायत बनने तक जारी रहेगी।
सिर्फ रोजमर्रा के काम कर सकेंगे अध्यक्ष
सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रशासक बनने के बाद पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष केवल सामान्य और रोजमर्रा के काम ही कर सकेंगे। उन्हें किसी नई योजना को मंजूरी देने, बड़े खर्च करने या महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेने का अधिकार नहीं होगा। यानी वे सिर्फ जरूरी प्रशासनिक काम संभालेंगे। अगर किसी खास मामले में बड़ा फैसला लेना जरूरी होगा तो उसे शासन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
जिलाधिकारी को मिली जिम्मेदारी
राज्य सरकार ने जिलाधिकारी (DM) को यह अधिकार दिया है कि वे अपने जिले के निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष को प्रशासक नियुक्त करें। यह फैसला जिला पंचायत अधिनियम के एक प्रावधान के तहत लिया गया है। कानून में व्यवस्था है कि यदि समय पर चुनाव नहीं हो पाते हैं तो सरकार अस्थायी रूप से प्रशासक नियुक्त कर सकती है। इसी नियम के आधार पर यह कदम उठाया गया है।
हाईकोर्ट में भी चल रहा है मामला
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में मामला चल रहा है। कुछ लोगों ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को चुनौती दी है। कोर्ट ने इस मामले में सरकार से जवाब भी मांगा है। ऐसे में जिला पंचायतों को लेकर लिया गया यह नया फैसला भी चर्चा का विषय बना हुआ है। फिलहाल सरकार का कहना है कि नई जिला पंचायतों के गठन तक प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए यह कदम जरूरी है।
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