जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दावा किया है कि उनकी पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के एक विधायक को पार्टी छोड़ने के लिए 20 से 30 करोड़ रुपये और मंत्री पद का ऑफर दिया गया था। उन्होंने कहा कि विधायक ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और इसकी जानकारी उन्हें दी। उमर अब्दुल्ला के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों इस मुद्दे पर आमने-सामने आ गए हैं। इस बयान को लेकर अब राजनीतिक बहस शुरू हो गई है और अलग-अलग दल अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
बीजेपी ने आरोपों को बताया झूठा
उमर अब्दुल्ला के आरोपों पर बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी सबूत के ऐसे आरोप लगाना ठीक नहीं है। बीजेपी का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री के पास कोई प्रमाण है तो उन्हें जनता के सामने रखना चाहिए। यदि सबूत नहीं हैं तो उन्हें अपने बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए। बीजेपी नेताओं का कहना है कि पार्टी पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और इनका कोई आधार नहीं है।
सरकार की नाकामी छिपाने का आरोप
बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि उमर अब्दुल्ला अपनी सरकार की कमियों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार को विकास कार्यों और जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को आरोप लगाने की बजाय अपने कामकाज पर फोकस करना चाहिए। बीजेपी का मानना है कि प्रदेश में शासन और विकास से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठ रहे हैं, इसलिए ऐसे बयान देकर माहौल बदलने की कोशिश की जा रही है।
अब सबूत या माफी पर टिकी नजर
इस पूरे विवाद के बाद अब सभी की नजर अगले कदम पर है। बीजेपी लगातार सबूत पेश करने की मांग कर रही है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने दावे पर कायम है। वहीं जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भी उमर अब्दुल्ला के बयान का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने जो बात कही है, वह गंभीर है और उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। फिलहाल दोनों दलों के बीच बयानबाजी जारी है। आने वाले दिनों में यह मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग ले सकता है। अब देखना होगा कि क्या इस मामले में कोई सबूत सामने आता है या फिर यह विवाद केवल आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रहता है।
