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उफनते नाले में समा गई बारातियों की कार, फिर मुस्लिम भाई कैसे बने 6 लोगों के लिए फरिश्ता? बचाई जान

महोबा में बारातियों से भरी बोलेरो कार उफनते नाले में बह गई। स्थानीय मुस्लिम युवकों और ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर छह लोगों को सुरक्षित बचाया। पढ़ें पूरी घटना और विभागीय लापरवाही की कहानी।

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उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने लोगों को इंसानियत और भाईचारे की असली ताकत दिखा दी। एक बारात बांदा जिले की ओर जा रही थी और परिवार में शादी की खुशियां थीं। लेकिन रास्ते में अचानक ऐसा हादसा हुआ जिसने सभी की सांसें रोक दीं। बारातियों से भरी एक बोलेरो कार सिरसीकला गांव के पास उफनते नाले में बह गई। कार में दूल्हे के पिता समेत छह लोग सवार थे। तेज बहाव में फंसी गाड़ी को देखकर आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कार में बैठे लोग मदद के लिए आवाज लगा रहे थे और हर गुजरते सेकंड के साथ खतरा बढ़ता जा रहा था। ऐसा लग रहा था कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन तभी गांव के कुछ लोगों ने साहस दिखाते हुए ऐसा कदम उठाया जिसने छह जिंदगियों को बचा लिया।

चीख-पुकार सुनते ही नदी में कूद पड़े ग्रामीण

हादसे के समय आसपास मौजूद स्थानीय युवकों ने बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि तौफीक और शफीक नाम के दो भाइयों ने सबसे पहले लोगों की चीखें सुनीं। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने अपने अन्य साथियों इरफान, जमशेद, दीनदयाल और कई ग्रामीणों को साथ लिया और सीधे उफनते पानी में उतर गए। पानी का बहाव इतना तेज था कि वहां पहुंचना भी आसान नहीं था, लेकिन किसी ने अपनी जान की परवाह नहीं की। करीब डेढ़ घंटे तक लगातार चले बचाव अभियान के बाद कार में फंसे सभी छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ग्रामीणों की इस बहादुरी ने न सिर्फ लोगों की जान बचाई, बल्कि समाज को यह संदेश भी दिया कि संकट के समय इंसानियत सबसे बड़ा धर्म होती है।

निर्माणाधीन पुल और सुरक्षा की कमी पर उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग और निर्माण एजेंसी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस पुल का निर्माण कार्य चल रहा है, वह काफी समय से अधूरा पड़ा है। पुल के पास एक अस्थायी रास्ता बनाया गया था, जिससे वाहन गुजर रहे थे। बारिश के कारण नाले में पानी का स्तर बढ़ा हुआ था, लेकिन वहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। लोगों का आरोप है कि न तो किसी तरह की बैरिकेडिंग लगाई गई थी और न ही खतरे की चेतावनी देने वाले बोर्ड लगाए गए थे। ऐसे में वाहन चालकों को यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि आगे कितना जोखिम मौजूद है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था की गई होती तो यह हादसा टाला जा सकता था।

भाईचारे की मिसाल बनी घटना, जांच की मांग तेज

इस घटना के बाद पूरे इलाके में उन ग्रामीणों की सराहना हो रही है जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर छह लोगों को बचाया। पुलिस और प्रशासन की टीम भी सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से वाहन को बाहर निकाला गया। राहत की बात यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई। हालांकि अब स्थानीय लोग निर्माण कार्य में हो रही देरी और सुरक्षा व्यवस्था की कमी की जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पुल निर्माण का काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है, जिससे रोजाना हजारों लोगों की जान खतरे में रहती है। वहीं दूसरी ओर, इस घटना ने हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक भाईचारे की ऐसी तस्वीर पेश की है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। लोगों का कहना है कि संकट के समय सभी ने मिलकर जिस तरह मानवता का परिचय दिया, वह समाज के लिए प्रेरणा का विषय है।

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