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पोती को आखिरी बार वीडियो कॉल पर देखा, फिर अचानक आई मौत की खबर… वियतनाम नाव हादसे की दर्दनाक कहानी ने रुलाया

वियतनाम के फू क्वोक द्वीप के पास हुए नाव हादसे में 15 भारतीयों की मौत हो गई। हादसे से पहले एक कारोबारी ने परिवार से आखिरी वीडियो कॉल की थी। पढ़िए इस दर्दनाक घटना की पूरी कहानी।

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वियतनाम में हुए दर्दनाक नाव हादसे ने कई भारतीय परिवारों की खुशियां एक पल में छीन लीं। एक मोबाइल कंपनी की ओर से आयोजित विशेष विदेश यात्रा पर गए भारतीय कारोबारियों और कर्मचारियों में से 15 लोगों की जान चली गई। यह हादसा वियतनाम के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल फू क्वोक द्वीप के पास हुआ, जहां पर्यटकों को अलग-अलग द्वीपों की सैर कराई जा रही थी। किसी ने सोचा भी नहीं था कि घूमने-फिरने के लिए शुरू हुआ यह सफर इतनी बड़ी त्रासदी में बदल जाएगा। हादसे की खबर मिलते ही भारत में परिवारों के बीच मातम फैल गया। केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारें अब मृतकों के शव भारत लाने की प्रक्रिया में जुटी हुई हैं ताकि परिवार अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई दे सकें।

सुबह परिवार से हुई बात, कुछ घंटों बाद आई दुखद सूचना

वियतनाम में हुए दर्दनाक नाव हादसे के मृतकों में तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली निवासी शेख अब्दुल्ला अब्दुल मजीद भी शामिल थे। परिवार के लोगों के अनुसार हादसे वाले दिन सुबह उन्होंने अपने घर पर वीडियो कॉल किया था। उन्होंने अपनी नवजात पोती को देखा, पत्नी और बेटे से बातचीत की और सब कुछ सामान्य लग रहा था। परिवार को बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि यह बातचीत उनकी आखिरी याद बन जाएगी। बताया गया कि मजीद पहले इस यात्रा पर जाने को लेकर उत्साहित नहीं थे और अपने बेटे को भेजने का विचार कर रहे थे, लेकिन बाद में खुद जाने का फैसला किया। द्वीप पर रवाना होने से पहले उन्होंने परिवार को बताया था कि जिस जगह वे जा रहे हैं वहां मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलेगा और लौटकर दोबारा बात करेंगे। दुर्भाग्य से वह कॉल कभी नहीं हो सकी।

कुछ ही सेकंड में पलटी नाव, यात्रियों को संभलने का मौका नहीं मिला

वियतनाम हादसे में बचने वाले कुछ लोगों ने पूरी घटना के बारे में जानकारी दी है। उनके अनुसार पर्यटकों को तीन अलग-अलग नावों में बैठाकर द्वीपों की सैर कराई जा रही थी। दुर्घटनाग्रस्त स्पीड बोट एक द्वीप से दूसरे द्वीप की ओर बढ़ी ही थी कि अचानक असंतुलित होकर पलट गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि घटना इतनी तेजी से हुई कि यात्रियों को प्रतिक्रिया देने का समय भी नहीं मिला। कुछ लोगों का मानना है कि ऊंची लहरें और नाव पर अधिक भार हादसे की वजह हो सकते हैं। नाव पलटने के बाद यात्रियों ने मदद के लिए आवाज लगाई, जिसके बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा। हालांकि कई लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी। हादसे में घायल हुए लोगों को इलाज के लिए स्थानीय अस्पतालों में भेजा गया।

पूरे देश में शोक, शवों को भारत लाने की तैयारी तेज

हादसे के बाद वियतनाम स्थित भारतीय दूतावास ने मृतकों की पहचान की पुष्टि की और परिवारों से संपर्क स्थापित किया। मृतकों में अधिकांश लोग तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल के निवासी बताए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। संबंधित राज्य सरकारों ने परिवारों को हर संभव सहायता देने का भरोसा दिया है। वहीं यात्रा आयोजित करने वाली कंपनी ने भी हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। फिलहाल सभी की नजरें शवों को जल्द भारत लाने की प्रक्रिया पर टिकी हैं। इस हादसे ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि जिंदगी कितनी अनिश्चित है और कभी-कभी एक सामान्य दिन भी किसी परिवार के लिए हमेशा के लिए याद बन जाता है।

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