उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए नए साल की शुरुआत राहत भरी होने जा रही है। जनवरी महीने के बिजली बिल में 2.33 प्रतिशत की सीधी छूट दी जाएगी, जिससे लाखों उपभोक्ताओं को तुरंत फायदा मिलेगा। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) ने इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। यह छूट ईंधन अधिभार शुल्क यानी FCA के तहत दी जा रही है, जिसमें अक्टूबर महीने के अधिभार का समायोजन जनवरी के बिल में किया जाएगा। इसका सीधा असर यह होगा कि एक महीने के लिए प्रदेश में बिजली पहले के मुकाबले सस्ती नजर आएगी। ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े जानकार मानते हैं कि यह फैसला केवल राहत नहीं बल्कि आने वाले समय के संकेत भी देता है।
141 करोड़ का सीधा फायदा, लेकिन पिछली वसूली ने बढ़ाई थी नाराजगी
UPPCL के इस फैसले से उपभोक्ताओं को करीब 141 करोड़ रुपये का सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। हालांकि इससे पहले उपभोक्ताओं को बड़ा झटका भी झेलना पड़ा था। सितंबर महीने के ईंधन अधिभार को दिसंबर में 5.56 प्रतिशत की दर से वसूला गया था, जिससे करीब 264 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली हुई। उस समय उपभोक्ता संगठनों ने इसे अनुचित बताया था और बिजली कंपनियों की नीति पर सवाल खड़े किए थे। अब जनवरी में दी जा रही छूट को उसी संतुलन के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन अधिभार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ता है, इसलिए पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
51 हजार करोड़ रुपये का सरप्लस, फिर क्यों लिया गया ईंधन अधिभार?
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस फैसले को लेकर एक बड़ा दावा किया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के अनुसार, बिजली कंपनियों के पास पहले से ही 33,122 करोड़ रुपये का सरप्लस जमा है। इतना ही नहीं, चालू वित्तीय वर्ष में करीब 18,592 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सरप्लस और जुड़ने की संभावना है। इस तरह कुल मिलाकर उपभोक्ताओं का 51 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा बिजली कंपनियों के पास सरप्लस के रूप में मौजूद है। उपभोक्ता परिषद का साफ कहना है कि जब तक इतना बड़ा सरप्लस उपलब्ध है, तब तक ईंधन अधिभार शुल्क के नाम पर किसी भी तरह की वसूली नहीं होनी चाहिए। केवल सरप्लस खत्म होने या घाटे की स्थिति में ही FCA लागू किया जाना चाहिए।
आगे और सस्ती हो सकती है बिजली? नए टैरिफ और संकेतों ने बढ़ाई उम्मीद
बिजली दरों को लेकर आने वाले महीनों में और राहत की उम्मीद भी जताई जा रही है। प्रदेश में ट्रांसमिशन डिमांड बेस्ड टैरिफ पहले ही लागू हो चुका है और नई बिजली दरों के आदेश भी प्रभावी हैं। उपभोक्ता परिषद का मानना है कि इन बदलावों का असर धीरे-धीरे बिजली बिलों पर दिखेगा। मौजूदा हालात को देखते हुए ईंधन अधिभार शुल्क में आगे भी कमी संभव है। अगर ऐसा होता है तो यह लाखों घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत साबित होगी। जनवरी की छूट को कई लोग आने वाले समय में बिजली दरों में स्थिरता और संभावित कटौती का संकेत भी मान रहे हैं।
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