उन्नाव रेप केस एक बार फिर देश की सियासत और न्याय व्यवस्था के केंद्र में आ गया है। दोषी कुलदीप सेंगर को मिली जमानत पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए भारतीय जनता पार्टी पर सीधा हमला बोला है। सपा नेताओं का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक अपराधी की सजा या जमानत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सत्ता, संरक्षण और न्याय की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या रसूखदार अपराधियों के लिए कानून अलग होता है। सपा का आरोप है कि यदि समय रहते उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट ने दखल नहीं दिया होता, तो पीड़िता को कभी न्याय की उम्मीद भी नहीं बचती। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि उन्नाव रेप केस अभी भी राजनीतिक और सामाजिक तौर पर बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
सपा का BJP पर तीखा हमला, लगाए गंभीर आरोप
जमानत पर रोक लगने के बाद समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भाजपा पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह मामला भाजपा के चरित्र को उजागर करता है। सपा नेता के अनुसार, भाजपा की कार्यशैली यह दिखाती है कि वह कई मामलों में बलात्कारियों के पक्ष में खड़ी नजर आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलदीप सेंगर के खिलाफ शुरुआत में मुकदमा भी सही तरीके से दर्ज नहीं किया गया और जब तक न्यायपालिका ने हस्तक्षेप नहीं किया, तब तक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। सपा का दावा है कि कमजोर पैरवी के चलते हाईकोर्ट से कुलदीप सेंगर को जमानत मिल गई थी, जिससे पीड़ित परिवार पूरी तरह टूट गया था। पार्टी का कहना है कि पीड़िता और उसका परिवार लंबे समय से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे थे और सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनकी उम्मीदों को फिर से जिंदा कर दिया है। सपा नेताओं ने यह भी कहा कि यह फैसला सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ है, जो सत्ता के दम पर अपराधियों को बचाने की कोशिश करती है।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख, चार हफ्ते बाद अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने की। अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर तत्काल रोक लगाते हुए साफ शब्दों में कहा कि यह मामला बेहद गंभीर प्रकृति का है। कोर्ट का मानना है कि ऐसे अपराधों में दोषी करार दिए गए व्यक्ति को राहत देना समाज और न्याय दोनों के लिए गलत संदेश देता है। सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद तय की है। अदालत ने यह भी संकेत दिए कि वह इस पूरे प्रकरण की गहराई से समीक्षा करेगी। इस फैसले के बाद कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदेश न सिर्फ उन्नाव रेप केस के लिए अहम है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों में जमानत को लेकर एक मजबूत नजीर भी बन सकता है। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख पीड़ितों के अधिकारों और न्याय की अवधारणा को मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से सड़कों तक गूंजा था विरोध
इस पूरे विवाद की जड़ उस वक्त और गहरी हो गई थी, जब दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की आजीवन कारावास की सजा को निलंबित कर उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था। इस फैसले से पीड़िता और उसका परिवार बुरी तरह आहत हो गया था। न्याय की मांग करते हुए पीड़िता इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गई थी, जिसकी तस्वीरें देशभर में सुर्खियां बनीं। सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए और आम लोगों ने भी इस फैसले पर सवाल खड़े किए। लोगों का कहना था कि इतने गंभीर अपराध में दोषी को राहत देना पीड़ित के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। अब सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद यह मामला फिर से निर्णायक मोड़ पर आ गया है। सपा समेत कई विपक्षी दलों का कहना है कि यह फैसला यह दिखाता है कि न्याय की लड़ाई भले ही लंबी हो, लेकिन उम्मीद अभी खत्म नहीं हुई है। आने वाली सुनवाई में पूरे देश की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी रहेंगी, जहां यह तय होगा कि कानून की नजर में अपराध और सजा का संतुलन किस तरह कायम रखा जाता है।
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