उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले नेताओं के दल बदलने का सिलसिला तेज होता दिखाई दे रहा है। इसी बीच पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) के कांग्रेस के साथ जाने की चर्चाओं ने यूपी की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक मौर्य दिल्ली पहुंचे हैं और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनकी मुलाकात की बात सामने आई है। इसके बाद उनके कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें तेज हुई हैं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में इसे अभी संभावित कदम के तौर पर ही बताया गया है।
बसपा से भाजपा और सपा तक रहा सफर
स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह बहुजन समाज पार्टी और भारतीय जनता पार्टी की सरकारों में मंत्री रह चुके हैं। इसके बाद उन्होंने समाजवादी पार्टी का रुख किया था। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले उनका बीजेपी से सपा में जाना भी काफी चर्चित रहा था। बाद में सपा से अलग होकर उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई। हाल के महीनों में मौर्य ने यूपी में अलग राजनीतिक मोर्चे की संभावनाओं को लेकर भी बयान दिए थे। जुलाई 2026 में चंद्रशेखर आजाद से उनकी मुलाकात के बाद भी तीसरे मोर्चे को लेकर चर्चाएं सामने आई थीं।
मौर्य के साथ कई और नामों की चर्चा
कांग्रेस में संभावित शामिल होने को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) के साथ कुछ अन्य नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मथुरा के पूर्व विधायक श्याम सुंदर शर्मा और दिल्ली के पूर्व विधायक अशोक कुमार भी कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं। हालांकि इन नेताओं की सदस्यता और कार्यक्रम को लेकर आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। इस बीच कांग्रेस ने यूपी में संगठन स्तर पर भी बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने अराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष और इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी है।
कांग्रेस में शामिल होंगे या बनेगा नया समीकरण?
स्वामी प्रसाद मौर्य (Swami Prasad Maurya) के कांग्रेस से जुड़ने की चर्चा ऐसे समय में सामने आई है, जब यूपी में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। मौर्य का राजनीतिक सफर कई प्रमुख दलों से होकर गुजरा है, इसलिए उनके अगले कदम पर राजनीतिक दलों और समर्थकों की नजर बनी हुई है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह कांग्रेस की औपचारिक सदस्यता लेते हैं या कांग्रेस के साथ किसी तरह का राजनीतिक तालमेल करते हैं। उनकी ओर से अंतिम फैसला और कांग्रेस की आधिकारिक घोषणा के बाद तस्वीर साफ होगी।
