बरेली से निलंबित किए गए सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस्तीफा देने और निलंबन के बाद वह वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने विद्या मठ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। यह मुलाकात सामान्य नहीं मानी जा रही है, क्योंकि इससे पहले शंकराचार्य ने फोन पर अग्निहोत्री से बात कर धर्म क्षेत्र में उनकी भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया था। कुछ दिन पहले अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य के अपमान और यूजीसी कानून के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। इसी पूरे मामले के बीच वाराणसी में हुई यह मुलाकात कई सवाल खड़े कर रही है। लोगों के बीच चर्चा है कि क्या अलंकार अग्निहोत्री अब प्रशासनिक सेवा छोड़कर धर्म और सामाजिक आंदोलन की राह पर आगे बढ़ेंगे। विद्या मठ में हुई बातचीत का पूरा विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन समर्थकों का कहना है कि यह मुलाकात आने वाले समय में बड़े फैसलों की शुरुआत हो सकती है।
कानपुर पहुंचे अलंकार, मां से लिया आशीर्वाद
वाराणसी से पहले अलंकार अग्निहोत्री अपने पैतृक शहर कानपुर पहुंचे। घर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले अपनी मां से मुलाकात की। मां ने उन्हें माला पहनाकर आशीर्वाद दिया, जिससे माहौल भावुक हो गया। इसके बाद मोहल्ले के लोगों ने बड़ी संख्या में उनका स्वागत किया। लोगों ने मिठाइयां बांटी, फूल बरसाए और उन्हें मंदिर ले जाकर सम्मानित किया। इस दौरान बुजुर्गों के साथ महिलाएं और युवा भी मौजूद रहे। कई लोगों ने अलंकार अग्निहोत्री के फैसले को साहसी बताया और कहा कि उन्होंने अपने विचारों के लिए पद छोड़ दिया। कानपुर में हुए इस स्वागत से साफ दिखा कि समाज के एक वर्ग में उनके लिए समर्थन बना हुआ है। लोगों का कहना है कि वह सिर्फ एक अधिकारी नहीं थे, बल्कि जनता की बात रखने वाले अफसर के रूप में जाने जाते थे। यही वजह है कि इस्तीफे और निलंबन के बाद भी लोग उनके साथ खड़े नजर आए।
पूरे देश में आंदोलन फैलाने का एलान
कानपुर पहुंचने के बाद अलंकार अग्निहोत्री ने मीडिया से बातचीत की और अपने आगे के इरादे साफ कर दिए। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन अब केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे पूरे देश में फैलाया जाएगा। उनके मुताबिक, अलग-अलग राज्यों से लोग उनसे संपर्क कर रहे हैं और आंदोलन से जुड़ना चाहते हैं। अग्निहोत्री ने यह भी कहा कि आने वाले समय में यह आंदोलन एससी-एसटी एक्ट को रद्द कराने की मांग को लेकर भी आगे बढ़ेगा। उनका कहना है कि मौजूदा कानूनों का गलत इस्तेमाल हो रहा है और समाज को जातियों में बांटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर हर लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाएंगे। अलंकार अग्निहोत्री का कहना है कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामियों के खिलाफ है। उन्होंने साफ किया कि वह पीछे हटने वाले नहीं हैं और यह आंदोलन लंबे समय तक चलेगा।
प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से मांगा इस्तीफा
अलंकार अग्निहोत्री ने केंद्र सरकार पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री से इस्तीफे की मांग कर दी। उनका आरोप है कि यूजीसी कानून को 2027 के चुनाव को ध्यान में रखकर बनाया गया है और इसका मकसद उत्तर प्रदेश की सामाजिक स्थिति को अस्थिर करना है। उन्होंने कहा कि यह कानून ओबीसी, सामान्य वर्ग और अन्य जातियों को आपस में लड़ाने की साजिश का हिस्सा है। अग्निहोत्री का दावा है कि अगर मौजूदा समय में चुनाव होते हैं, तो केंद्र सरकार के बड़े नेता सीटें नहीं जीत पाएंगे। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। कुछ लोग इसे खुलकर बोलने वाली आवाज बता रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीति से प्रेरित कदम मान रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि अलंकार अग्निहोत्री अब एक पूर्व अधिकारी से आगे बढ़कर आंदोलन और राजनीति के केंद्र में आ चुके हैं, और आने वाले दिनों में उनका यह कदम और बड़ी बहस खड़ी कर सकता है।
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