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यूपी में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला, CM योगी ने दे दिया बड़ा आदेश

यूपी में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार सख्त हुई है। 12 साल तक के बच्चों के लिए स्कूल वाहन में अटेंडेंट अनिवार्य होगा और वाहनों की नियमित जांच की जाएगी।

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UP School News: उत्तर प्रदेश में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। स्कूल जाने वाले बच्चों को किसी तरह का खतरा न हो, इसके लिए विद्यालयों और स्कूल वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। परिवहन विभाग ने प्रदेश के सभी स्कूलों के प्रबंधकों को पत्र भेजकर सुरक्षा नियमों का पालन करने को कहा है। इसके साथ ही स्कूल वाहनों की नियमित जांच भी की जाएगी। नियमों में लापरवाही मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

12 साल तक के बच्चों के लिए स्कूल वाहन में अटेंडेंट जरूरी

परिवहन विभाग के निर्देश के मुताबिक, 12 वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चों को ले जाने वाले स्कूल वाहनों में एक परिचारक या परिचारिका रखना जरूरी होगा। इस व्यक्ति की जिम्मेदारी बच्चों को वाहन में सुरक्षित बैठाने और स्कूल पहुंचने के बाद सुरक्षित उतारने की होगी। खासकर छोटे बच्चों के मामले में यह व्यवस्था काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकार का उद्देश्य है कि बच्चे स्कूल आने-जाने के दौरान किसी तरह के जोखिम में न रहें। विद्यालय प्रबंधन को भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीरता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार की ओर से साफ किया गया है कि सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

ड्राइवर की जांच से लेकर वाहन की फिटनेस तक होगी निगरानी

स्कूल वाहनों को चलाने वाले ड्राइवरों की भी जांच अनिवार्य रूप से कराने को कहा गया है। विद्यालय प्रबंधन को चालकों का चरित्र सत्यापन और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण सुनिश्चित करना होगा। इसके अलावा स्कूल बस या अन्य वाहन की फिटनेस, परमिट और बीमा जैसे जरूरी दस्तावेज भी वैध होने चाहिए। किसी वाहन की फिटनेस ठीक नहीं है या उसके जरूरी कागजात पूरे नहीं हैं तो उसे बच्चों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है कि बच्चों की यात्रा के दौरान वाहन से जुड़ी कोई बड़ी समस्या सामने न आए।

हर महीने होगी सुरक्षा उपकरणों की जांच

स्कूल के ट्रांसपोर्ट इंचार्ज को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। उसे हर महीने स्कूल वाहनों में मौजूद सुरक्षा इंतजामों की जांच करनी होगी। इनमें प्राथमिक चिकित्सा किट, फायर एक्सटिंग्विशर और इमरजेंसी अलार्म जैसे जरूरी उपकरण शामिल हैं। इन सभी उपकरणों को सही स्थिति में और इस्तेमाल के लिए तैयार रखना होगा। इसके साथ ही वाहन की सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी मिलने पर उसे तुरंत दूर करने की जिम्मेदारी भी स्कूल प्रबंधन की होगी। परिवहन विभाग की टीम समय-समय पर स्कूल वाहनों की जांच करेगी। जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई की जा सकती है। सरकार के इस कदम से स्कूलों पर बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर रखने का दबाव बढ़ेगा और अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर भरोसा मिलेगा।

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