उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रहने वाले रवि टम्टा ने ऐसा वाहन तैयार किया है, जो हवा में उड़ सकता है। रवि ने इसे HAPIDA SKYNEX नाम दिया है। यह एक सिंगल-सीटर इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल है। इसे ड्रोन की तकनीक के आधार पर बनाया गया है। रवि ने इसका टेस्ट भी किया है। टेस्ट के दौरान यह वाहन जमीन से ऊपर उठकर कुछ देर तक हवा में उड़ता दिखाई दिया। इसका वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग रवि के इस काम की तारीफ कर रहे हैं। हालांकि, यह अभी एक प्रोटोटाइप है। यानी इसे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए तैयार वाहन नहीं माना जा सकता।
करीब 20 फीट ऊपर उड़ता दिखाई दिया वाहन
रवि के टेस्ट के दौरान फ्लाइंग व्हीकल ने खुले मैदान से उड़ान भरी। बताया जा रहा है कि यह करीब 20 फीट से ज्यादा ऊंचाई तक गया। इसके बाद यह वापस जमीन पर उतर गया। वाहन में सिर्फ एक व्यक्ति के बैठने की जगह बताई गई है। यह इलेक्ट्रिक सिस्टम और ड्रोन तकनीक पर काम करता है। अभी इस वाहन पर आगे भी कई टेस्ट किए जाने बाकी हैं। उड़ान के दौरान सुरक्षा, बैटरी कितनी देर चलेगी और वाहन को कैसे नियंत्रित किया जाएगा, जैसे कई सवालों पर काम करना होगा। इसके अलावा इसे आम लोगों के लिए इस्तेमाल करने से पहले सरकार से जरूरी मंजूरी भी लेनी होगी।
40 किलोमीटर का सफर बना आइडिया की वजह
रवि टम्टा का गांव अल्मोड़ा के काफलीखान इलाके में है। उन्हें गांव से करीब 40 किलोमीटर दूर जाने में सड़क के रास्ते लगभग डेढ़ घंटे का समय लगता था। पहाड़ों में सड़कें घुमावदार होने की वजह से सफर में ज्यादा समय लगता है। इसी परेशानी ने रवि को कुछ अलग करने के बारे में सोचने पर मजबूर किया। उनके मन में विचार आया कि अगर यही सफर हवा के रास्ते किया जाए तो काफी कम समय लग सकता है। इसी सोच के बाद उन्होंने एक ऐसे वाहन पर काम शुरू किया, जो हवा में उड़ सके। उनका मानना है कि भविष्य में इस तरह की तकनीक पहाड़ी इलाकों में लोगों के आने-जाने में मदद कर सकती है।
रवि के काम की हो रही तारीफ
फ्लाइंग व्हीकल के टेस्ट का वीडियो सामने आने के बाद रवि टम्टा की काफी चर्चा हो रही है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई लोगों ने उनके प्रयास की तारीफ की है। रवि का यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती दौर में है। इसे सड़क पर चलने वाली सामान्य कार की तरह इस्तेमाल करने में अभी काफी समय लग सकता है। इसके लिए सुरक्षा, बैटरी, मौसम, उड़ान के नियम और एयर ट्रैफिक जैसे कई पहलुओं पर काम करना होगा। इसके बावजूद रवि का यह प्रयास दिखाता है कि देश के युवा नई तकनीक पर काम कर रहे हैं। अगर आने वाले समय में इसके टेस्ट सफल होते हैं और जरूरी मंजूरी मिलती है, तो ऐसी तकनीक खासकर पहाड़ी इलाकों में सफर का तरीका बदल सकती है।
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