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शाम की खुशियां बनी मातम, सुल्तानपुर में ऐसा क्या हुआ कि पलभर में उजड़ गई 7 जिंदगियां?

सुल्तानपुर में तेज आंधी-तूफान से 7 लोगों की मौत, 21 घायल। जानिए पूरी घटना, प्रभावित इलाके, दर्दनाक कहानियां और प्रशासन की राहत कार्रवाई।

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उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में बुधवार शाम मौसम ने ऐसा रुख बदला कि कुछ ही मिनटों में खुशियां मातम में बदल गईं। तेज आंधी, तूफान और बारिश ने जिले के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई। बल्दीराय, हलियापुर, अखंडनगर, बंधुआकला और कुड़वार थाना क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर देखा गया। इस भीषण आपदा में दो मासूम बच्चों समेत 7 लोगों की जान चली गई, जबकि 21 से अधिक लोग घायल हो गए। घायलों में से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है और उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अचानक आए इस तूफान ने न सिर्फ जनजीवन अस्त-व्यस्त किया बल्कि लोगों के घर, वाहन और बुनियादी ढांचे को भी बुरी तरह प्रभावित किया।

दिल दहला देने वाली घटनाएं

इस त्रासदी की सबसे मार्मिक घटना कुड़वार क्षेत्र के पूरे शिववंश दुबे गांव से सामने आई, जहां 20 वर्षीय महेंद्र तिवारी की मौत बिजली का खंभा गिरने से हो गई। महेंद्र कुछ ही दिन पहले अपनी बहन की शादी की तैयारी के लिए घर लौटा था, लेकिन एक झटके में परिवार की खुशियां खत्म हो गईं। इसी तरह बल्दीराय क्षेत्र में 8 साल की मासूम महिमा छप्पर गिरने से मलबे में दब गई और उसकी जान चली गई। सिंघनी गांव में 58 वर्षीय रामबरन की पेड़ गिरने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं। इन घटनाओं ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है और हर तरफ शोक का माहौल है।

कई गांवों में मौत और तबाही का सिलसिला

आंधी-तूफान का कहर यहीं नहीं थमा। हलियापुर के डोभियारा गांव में 35 वर्षीय रीता की कच्ची दीवार गिरने से मौत हो गई, जो तीन बच्चों की मां थीं। अखंडनगर क्षेत्र में 8 साल के सुरेमन की जान चली गई, जबकि दो अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। बंधुआकला में पेड़ गिरने से 40 वर्षीय सुषमा गुप्ता की मौत हो गई। वहीं कूरेभार क्षेत्र में 70 वर्षीय केवला देवी दीवार के मलबे में दबकर दम तोड़ गईं। कई अन्य लोग भी इस आपदा में घायल हुए हैं। जगह-जगह पेड़ गिरने से सड़कें बाधित हो गईं, कई घर क्षतिग्रस्त हो गए और रेलवे ट्रैक तक प्रभावित हुआ, जिससे यातायात व्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा गई।

प्रशासन अलर्ट, राहत और मुआवजे की तैयारी

इस प्राकृतिक आपदा के बाद प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा रहे हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर बने टोल प्लाजा को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे यातायात प्रभावित हुआ। इसके अलावा, बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है—50 से ज्यादा ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त हो गए और कई बिजली के खंभे गिर गए। बिजली विभाग मरम्मत कार्य में जुटा हुआ है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि हर पीड़ित तक मदद पहुंचाई जाएगी और स्थिति को जल्द सामान्य बनाने की कोशिश की जा रही है।

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