दुनिया के दो सबसे ताकतवर और चर्चित नेताओं, डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच हाल ही में हुई एक फोन कॉल ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। करीब डेढ़ घंटे (90 मिनट) तक चली इस लंबी और मैराथन बातचीत में कुछ ऐसा हुआ है जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी। खुद ट्रंप ने इस बातचीत के अंश साझा करते हुए संकेत दिया है कि रूस-यूक्रेन युद्ध का अंत अब करीब हो सकता है। यह बातचीत केवल औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसमें एक ऐसी ‘डील’ की खुशबू आ रही है जो आने वाले दिनों में वैश्विक राजनीति का नक्शा बदल सकती है।
ट्रंप की सलाह और पुतिन का ग्रीन सिग्नल?
ट्रंप ने पुतिन को यूक्रेन युद्ध में ‘सीजफायर’ यानी युद्धविराम का सुझाव दिया है। ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा, “मैंने पुतिन से बात की है और मुझे लगता है कि वे मेरी बात मानेंगे।” खबर है कि पुतिन ने 9 मई को मनाए जाने वाले ‘विक्ट्री डे’ के मौके पर युद्ध रोकने के संकेत दिए हैं। यह वह दिन है जब रूस और अमेरिका ने मिलकर दूसरे विश्व युद्ध में जीत हासिल की थी। ट्रंप चाहते हैं कि इसी ऐतिहासिक दिन का इस्तेमाल करके इस आधुनिक युद्ध को भी विराम दिया जाए। ट्रंप का मानना है कि पुतिन के साथ उनके पुराने संबंध इस कूटनीतिक जीत की चाबी बनेंगे।
पुतिन की मदद की पेशकश
बातचीत केवल यूक्रेन तक ही सीमित नहीं रही। जब पुतिन और ट्रंप लाइन पर थे, तो चर्चा ईरान के परमाणु कार्यक्रम और वहां बढ़ रहे तनाव पर भी हुई। पुतिन ने इस मामले में मध्यस्थता करने और मदद देने की बात कही। हालांकि, ट्रंप ने यहां अपनी प्राथमिकताएं बिल्कुल साफ कर दीं। ट्रंप ने पुतिन से दो-टूक कहा कि ईरान का मामला जरूरी है, लेकिन इस वक्त दुनिया की नजरें यूक्रेन पर हैं। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि पुतिन सबसे पहले अपना पूरा फोकस यूक्रेन युद्ध को खत्म करने पर लगाएं। यह दिखाता है कि ट्रंप अब एक ‘पीसमेकर’ की भूमिका में खुद को मजबूती से खड़ा करना चाहते हैं।
युद्ध के मैदान में किसका पलड़ा भारी?
इस बातचीत के बाद क्रेमलिन के सलाहकार यूरी उशाकोव ने जो विवरण दिया, वह और भी चौंकाने वाला है। उशाकोव के अनुसार, पुतिन ने ट्रंप को युद्ध के मैदान की असली स्थिति बताई। पुतिन का दावा है कि रूसी सेना फिलहाल भारी पड़ रही है और यूक्रेनी सैनिकों को उनके ठिकानों से पीछे हटने पर मजबूर कर रही है। इतनी मजबूत स्थिति में होने के बावजूद, पुतिन का ट्रंप की कॉल को 90 मिनट तक सुनना और युद्धविराम पर विचार करना यह बताता है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ी खिचड़ी पक रही है। ट्रंप ने भी रूसी पक्ष से मिल रही जानकारियों को काफी गंभीरता से लिया है।
जेलेंस्की पर ‘एक सुर’ में बोले दोनों दिग्गज
हैरानी की बात यह रही कि इस बातचीत में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की को लेकर ट्रंप और पुतिन की राय एक जैसी नजर आई। दोनों ही नेताओं का मानना है कि यूक्रेन का मौजूदा प्रशासन शांति की कोशिशों में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है, बल्कि वे इस युद्ध को और लंबा खींचना चाहते हैं। ट्रंप और पुतिन का यह ‘एक जैसा नजरिया’ जेलेंस्की और उनके समर्थक यूरोपीय देशों के लिए खतरे की घंटी हो सकता है। अगर अमेरिका और रूस के बीच सीधे तौर पर कोई समझौता हो जाता है, तो यूक्रेन के लिए अपनी शर्तों पर युद्ध लड़ना नामुमकिन हो जाएगा। फिलहाल, पूरी दुनिया 9 मई का इंतजार कर रही है, जो इस बातचीत का असली नतीजा पेश करेगा।
