साउथ-वेस्ट दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब ‘हॉस्टल डेज’ नाम की चार मंजिला बिल्डिंग अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई। राहत और बचाव टीमों ने अब तक 7 लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया है, जबकि हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना की सूचना दोपहर करीब 1:30 बजे दिल्ली फायर सर्विस को मिली थी। इसके कुछ मिनट बाद साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन को भी PCR कॉल के जरिए बिल्डिंग गिरने की जानकारी मिली।
बेसमेंट में चल रहा था काम, पहले भी मिला था नोटिस
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, सत्य निकेतन इलाके में हादसे वाली इमारत में करीब 10 कमरों का PG संचालित हो रहा था। बताया जा रहा है कि बिल्डिंग के बेसमेंट में निर्माण या रेनोवेशन का काम चल रहा था। स्थानीय जानकारी के अनुसार, करीब एक महीने पहले भी बिल्डिंग को नोटिस दिया गया था, जबकि एक साल पहले इसे खाली करवाए जाने की बात भी सामने आई है। इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर मेडिकल शॉप चल रही थी और ऊपर के हिस्सों में PG के कमरे थे। बचाव अभियान के दौरान मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी मंगाए गए। मौके पर फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां, पुलिस, CAT एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन टीमें मौजूद रहीं।
‘भूकंप जैसी आवाज आई और पूरी बिल्डिंग गिर गई’
सत्य निकेतन इलाके में हादसे के बाद मौके पर मौजूद एक चश्मदीद ने बताया कि बिल्डिंग गिरने से ठीक पहले तेज आवाज सुनाई दी थी। इसके बाद अचानक धूल और धुआं फैल गया और पूरी इमारत मलबे में बदल गई। चश्मदीद के मुताबिक, मलबे के अंदर से लोगों की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं। स्थानीय लोगों ने यह भी दावा किया कि इमारत के निचले हिस्से में निर्माण कार्य के दौरान पिलर कमजोर होने की आशंका थी। हालांकि, बिल्डिंग गिरने की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी। प्रशासन और राहत टीमें मलबे में किसी अन्य व्यक्ति के फंसे होने की संभावना को देखते हुए लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं।
मालिक के खिलाफ केस, सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
पुलिस ने बिल्डिंग मालिक आनंद बंसल के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार, आनंद बंसल गुरुग्राम में रहता है और उसके कई PG संचालित होते हैं। जानकारी के मुताबिक, ‘हॉस्टल डेज’ की इमारत में चार फ्लोर और टेरेस था। अलग-अलग मंजिलों पर कमरों को किराए पर दिया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत में गलियां काफी संकरी थीं और आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए पर्याप्त वैकल्पिक रास्ता नहीं था। अब पुलिस और संबंधित विभाग बिल्डिंग की स्थिति, निर्माण कार्य और सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रहे हैं। हादसे के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि पहले नोटिस मिलने के बावजूद यहां गतिविधियां कैसे जारी रहीं।
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