UP News: उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। गौरीबाजार थाना क्षेत्र के करमेल गांव निवासी 21 वर्षीय अभिषेक निषाद की यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास हुए एक हमले में मौत हो गई। बताया जा रहा है कि अभिषेक एक मालवाहक जहाज पर डेक कैडेट के रूप में काम कर रहे थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, जहाज पर हुए रूसी हमले के दौरान वह उसकी चपेट में आ गए। घटना की सूचना जैसे ही परिवार तक पहुंची, पूरे घर में मातम छा गया। गांव के लोग भी इस खबर से स्तब्ध हैं। कुछ ही समय पहले विदेश जाकर बेहतर भविष्य बनाने का सपना देखने वाला युवा अब हमेशा के लिए अपनों से दूर हो गया।
एक महीने पहले ही विदेश गया था अभिषेक
परिजनों के अनुसार, अभिषेक निषाद करीब एक माह पहले नौकरी के सिलसिले में विदेश गए थे। उन्हें एक शिपिंग कंपनी में डेक कैडेट की जिम्मेदारी मिली थी। परिवार को उम्मीद थी कि बेटे की नौकरी से घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। अभिषेक के पिता कौशल कुमार निषाद को कंपनी की ओर से फोन कर हादसे की जानकारी दी गई। बताया गया कि हमले के बाद कुछ समय तक अभिषेक से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन करीब तीन घंटे बाद उनका मोबाइल बंद हो गया। इसके बाद उनसे कोई बात नहीं हो सकी। बाद में कंपनी ने उनके निधन की सूचना दी। हालांकि, परिवार का कहना है कि अब तक उन्हें कोई आधिकारिक दस्तावेज या पार्थिव शरीर भारत लाने की निश्चित जानकारी नहीं दी गई है।
इकलौते बेटे की मौत से टूट गया परिवार
अभिषेक अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। बेटे की मौत की खबर सुनते ही मां अनीता देवी की हालत लगातार बिगड़ रही है। उनकी दोनों बहनें साधना और आराधना भी गहरे सदमे में हैं और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। घर पर रिश्तेदारों, पड़ोसियों और गांव के लोगों का लगातार आना-जाना लगा हुआ है। हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इकलौते बेटे को खोने का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है। गांव के लोगों का कहना है कि अभिषेक मेहनती और जिम्मेदार युवक थे, जिन्होंने कम उम्र में ही परिवार का सहारा बनने का फैसला किया था। उनकी असमय मौत ने पूरे इलाके को दुखी कर दिया है।
परिवार ने सरकार से लगाई मदद की गुहार, शव लाने की मांग
अभिषेक के परिजनों ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की है कि उनके बेटे का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाया जाए ताकि परिवार अंतिम दर्शन कर सके। साथ ही उन्होंने बड़ी बहन साधना को सरकारी नौकरी और परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग भी की है। स्थानीय पुलिस ने भी परिवार से संपर्क कर घटना की जानकारी जुटाई है। गौर करने वाली बात यह है कि कुछ समय पहले ही ओमान तट पर हुए एक अन्य हमले में भी देवरिया के एक युवक की मौत हुई थी। लगातार दूसरी ऐसी घटना से जिले के लोगों में चिंता बढ़ गई है। फिलहाल पूरा परिवार सरकार और संबंधित एजेंसियों से मदद की उम्मीद लगाए बैठा है, ताकि अभिषेक का पार्थिव शरीर जल्द अपने घर पहुंच सके और परिवार अपने बेटे को अंतिम विदाई दे सके।
