बिहार की राजनीति से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर खलबली मचा दी है। आगामी विधान परिषद (MLC) चुनाव से ठीक पहले लालू प्रसाद यादव के सबसे वफादार और पार्टी के कद्दावर दलित चेहरे ने आरजेडी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। संवाददाता सम्मेलन के दौरान अपने आंसुओं को न रोक पाने वाले इस नेता के इस्तीफे ने बिहार के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या आरजेडी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है? कयास लगाए जा रहे हैं कि यह अंदरूनी कलह आने वाले समय में तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए एक बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकती है।
वफादारी का दर्द: जब कैमरे के सामने फूट-फूटकर रो पड़े पूर्व मंत्री
दरअसल, यह पूरा मामला आरजेडी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री शिवचंद्र राम से जुड़ा है। शिवचंद्र राम ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर वादाखिलाफी और मान-सम्मान न देने का गंभीर आरोप लगाते हुए अपने सभी पदों को छोड़ दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनका दर्द इस कदर छलका कि वे कैमरे के सामने ही फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वे साल 1990 से, यानी पिछले तीन दशकों से लालू प्रसाद यादव के प्रति पूरी तरह समर्पित रहे हैं। उन्होंने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव का आभार भी जताया कि पार्टी ने उन्हें पहले विधायक, मंत्री और लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बनाया। लेकिन, मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी के भीतर उनके मान-सम्मान को ठेस पहुंची है, जिसके कारण भारी मन से उन्हें यह कड़ा कदम उठाना पड़ रहा है।
टिकट कटने की इनसाइड स्टोरी: सुनील सिंह की एंट्री और रोहिणी आचार्य का वो पोस्ट
राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे की मुख्य वजह विधान परिषद (MLC) चुनाव में टिकट न मिलना बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, शिवचंद्र राम को पूरी उम्मीद थी कि पार्टी उन्हें इस बार चांस देगी, लेकिन आरजेडी ने अचानक सुनील सिंह को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद से ही पार्टी के भीतर अंदरूनी असंतोष की आग सुलगने लगी थी। दिलचस्प बात यह है कि इस विवाद की पटकथा पहले ही लिखी जा चुकी थी, जब लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर आरजेडी के एमएलसी उम्मीदवार के चयन को लेकर सवाल खड़े किए थे। रोहिणी के उस पोस्ट ने पार्टी के भीतर के तनाव को सार्वजनिक कर दिया था और अब शिवचंद्र राम के इस्तीफे ने उस पर मुहर लगा दी है।
समर्थकों का पटना में डेरा और आरजेडी के कोर वोटबैंक में सेंधमारी का खतरा
शिवचंद्र राम के इस फैसले के बाद उनके समर्थकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि पिछले तीन दिनों से उनके सैकड़ों समर्थक पटना के अलग-अलग होटलों में डेरा डाले हुए थे और आरजेडी नेतृत्व के फैसले पर नजर रख रहे थे। पूर्व मंत्री ने साफ कहा है कि उनके विधान परिषद न जाने से सिर्फ वे ही नहीं, बल्कि राज्य के अनुसूचित जाति के लोग और आम गरीब बेहद दुखी हैं। हालांकि, उन्होंने पार्टी से पूरी तरह नाता तोड़ने को लेकर कहा कि वे अपने राजनीतिक भविष्य और आगे की रणनीति पर समर्थकों से बात करके जल्द ही अंतिम फैसला लेंगे। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर आरजेडी के बड़े नेताओं की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन पार्टी के भीतर मची यह रार अब खुलकर सड़क पर आ चुकी है।
