यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी आग ने जालौन के उरई निवासी एक परिवार को गहरा सदमा दिया। 55 वर्षीय हरिशरण गुप्ता अपने बीमार बेटे ओम को नोएडा से घर लाने के लिए गए थे। हरिशरण उरई के राजेंद्र नगर में परिवार के साथ रहते थे और एक कंपनी में अकाउंटेंट के तौर पर काम करते थे। परिवार में उनकी पत्नी ज्योति, तीन बेटियां राधिका, रिचा और मानसी के अलावा बेटा ओम है। ओम नोएडा में रहकर बीटेक की पढ़ाई कर रहा था और कुछ समय से उसकी तबीयत खराब थी। बेटे की हालत देखने के बाद हरिशरण उसे अपने साथ उरई लेकर लौट रहे थे। रात करीब नौ बजे दोनों स्लीपर बस में सवार हुए, लेकिन कुछ ही देर बाद यह सफर परिवार के लिए जिंदगी का सबसे दर्दनाक हादसा बन गया।
आग लगी तो पिता ने बेटे को खिड़की से बाहर निकाला
यमुना एक्सप्रेसवे पर पहुंचते ही बस में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते अंदर धुआं भर गया और यात्रियों के बीच भगदड़ मच गई। हरिशरण की नजर अपने बेटे ओम पर पड़ी, जो बीमारी के कारण पहले से कमजोर था। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना बेटे को बचाने की कोशिश शुरू कर दी। आग के बीच उन्होंने ओम को बस की खिड़की से बाहर निकाल दिया। बेटा किसी तरह बाहर आ गया और उसकी जान बच गई, लेकिन हरिशरण खुद बाहर नहीं निकल पाए। आग तेजी से फैलती गई और वह उसकी चपेट में आ गए। जिस पिता का मकसद बेटे को सुरक्षित घर पहुंचाना था, उसी बेटे की जिंदगी बचाने के दौरान उनकी मौत हो गई।
बेटी घटनास्थल पर पहुंची, घायल भाई को संभाला
हादसे की खबर परिवार तक पहुंचते ही घर में मातम छा गया। पिता की मौत और भाई के घायल होने की सूचना मिलने के बाद परिवार के लोग घटनास्थल की ओर रवाना हुए। हरिशरण की बेटी राधिका भी मौके पर पहुंची और घायल ओम को संभाला। एक तरफ परिवार ने अपने पिता और कमाऊ सदस्य को खो दिया, तो दूसरी ओर ओम की जान बच गई। इस हादसे ने एक बार फिर दिखाया कि संकट की घड़ी में एक पिता अपने बच्चे को बचाने के लिए किस हद तक जा सकता है। हरिशरण का अंतिम सफर बेटे को घर लाने के इरादे से शुरू हुआ था, लेकिन रास्ते में ही उनकी जिंदगी खत्म हो गई।
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