देश में महंगाई से जूझ रही जनता को एक और बड़ा झटका लग सकता है। एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर की कीमतें आने वाले समय में और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हाल ही में सरकार की ओर से इस बात के संकेत दिए गए हैं कि वैश्विक परिस्थितियों और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण गैस की कीमतों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले भी पेट्रोल-डीजल और कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी देखी गई थी, जिससे आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर असर पड़ा है। अब घरेलू सिलेंडर के दामों में संभावित बढ़ोतरी ने चिंता और बढ़ा दी है।
सरकार का बयान—वैश्विक संकट और सप्लाई चेन को बताया वजह
केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने हाल ही में गैस कीमतों को लेकर बयान दिया है, जिसमें उन्होंने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात को मुख्य वजह बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय कई गंभीर संकटों से गुजर रही है, जिसका असर सीधे ऊर्जा और ईंधन बाजार पर पड़ रहा है। उनके अनुसार, एलपीजी की सप्लाई सीमित जगहों से हो रही है, जिससे इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रांसपोर्टेशन और शिपिंग कॉस्ट में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे कुल कीमतों पर असर पड़ रहा है। इसके अलावा सामान की डिलीवरी में 40 से 45 दिन तक का समय लग रहा है, जिससे इंश्योरेंस और लॉजिस्टिक खर्च भी बढ़ गया है। सरकार का कहना है कि इन परिस्थितियों में कीमतें बढ़ना मजबूरी बन गया है।
पहले ही बढ़ चुके हैं सिलेंडर के दाम, जनता पर असर साफ दिखा
हाल ही में 7 जून को घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत बढ़कर 942 रुपये हो गई है। इससे पहले कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी बढ़ाए गए थे, जिसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारों पर पड़ा है। कई व्यापारियों ने पहले ही बढ़ती लागत को लेकर चिंता जताई थी, क्योंकि इससे खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी प्रभावित होती हैं। लगातार हो रही कीमतों में बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ता के घरेलू बजट को भी प्रभावित किया है।
आगे और बढ़ सकती हैं कीमतें, लोगों में चिंता बढ़ी
सरकार के संकेतों के बाद अब यह आशंका और बढ़ गई है कि आने वाले समय में एलपीजी सिलेंडर और महंगा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक सप्लाई में अनिश्चितता और ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ने से कीमतों पर दबाव बना रहेगा। आम लोगों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि रसोई गैस पहले से ही घरेलू बजट का बड़ा हिस्सा बन चुकी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार आगे क्या कदम उठाती है और क्या किसी तरह की राहत दी जाएगी या नहीं।
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