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बिहार की राजनीति में तेज प्रताप यादव ने कर दी बड़ी भविष्यवाणी, इतने महीनों में चली जाएगी मुख्यमंत्री की कुर्सी?

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बिहार में इस समय सरकारी बंगले को लेकर राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी घर खाली करने का अल्टीमेटम मिलने के बाद से ही लालू परिवार और सरकार के बीच तनातनी चल रही है। इसी बीच बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक तीखे बयान ने इस विवाद को और बढ़ा दिया। मुख्यमंत्री ने किसी का नाम लिए बिना साफ कह दिया कि सरकारी बंगला किसी की ‘बपौती’ नहीं है, पद छोड़ने के बाद इसे खाली करना ही पड़ेगा। सम्राट चौधरी के इसी बयान पर राबड़ी देवी के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव बुरी तरह भड़क गए हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री को लेकर एक ऐसी भविष्यवाणी कर दी है जिसने सबको चौंका दिया है।

तेज प्रताप का सम्राट चौधरी पर बड़ा दावा

मुख्यमंत्री के ‘बपौती’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए तेज प्रताप यादव ने एक बहुत बड़ा दावा कर दिया है। उन्होंने मीडिया के सामने खुलेआम भविष्यवाणी करते हुए कहा कि सम्राट चौधरी अगले 8 से 9 महीने के भीतर खुद ही मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़कर चले जाएंगे। तेज प्रताप ने कहा कि सम्राट चौधरी जिस बड़े और सम्मानजनक पद पर बैठे हैं, उन्हें अपनी भाषा का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह उम्र में हमसे बड़े हैं, लेकिन मुख्यमंत्री जैसी कुर्सी पर बैठकर इस तरह की अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करना पूरी तरह से गलत और निंदनीय है।

नीतीश कुमार पर उठाए सवाल

तेज प्रताप यादव ने सरकार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया है। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि अगर नियम सबके लिए बराबर है, तो फिर नीतीश कुमार, जीतन राम मांझी या उपेंद्र कुशवाहा के बंगले खाली क्यों नहीं कराए जा रहे हैं? तेज प्रताप ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार तो अक्सर दिल्ली में रहते हैं, फिर भी मुख्यमंत्री आवास और बगल के एक और बंगले की दीवार को तोड़कर एक में मिला दिया गया। उन्होंने पूछा कि जब उन बड़े नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, तो केवल उनके परिवार को ही क्यों परेशान किया जा रहा है।

‘मेरी मां अभी भी सदन की सदस्य हैं’— नियमों पर घेरा

अपनी बात रखते हुए तेज प्रताप यादव ने साफ किया कि उनकी मां राबड़ी देवी वर्तमान में सदन की सदस्य हैं, इसलिए उनका आवास खाली कराने का कोई नियम नहीं बनता। उन्होंने कहा कि बिहार में ऐसे कई पूर्व मंत्री और नेता हैं जो सालों से सरकारी बंगलों में आराम से रह रहे हैं और उनसे कोई कुछ नहीं कहता। तेज प्रताप ने मांग की कि अगर कानून का पालन करवाना ही है, तो पक्षपात बंद होना चाहिए और इसकी शुरुआत सबसे पहले नीतीश कुमार से होनी चाहिए। इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया मोड़ आ गया है।

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