बिहार विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के दौरान नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav ने एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा। अपने भाषण में उन्होंने सरकार की स्थिरता और नेतृत्व को लेकर कई सवाल खड़े किए। तेजस्वी ने कहा कि राज्य में बार-बार सरकार बदलना इस बात का संकेत है कि सत्ता पक्ष के भीतर ही सब कुछ ठीक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पहले ही स्पष्ट कर दिया जाता कि मुख्यमंत्री बीजेपी का होगा, तो इस तरह का विशेष सत्र बुलाने की जरूरत नहीं पड़ती। उनके बयान के बाद सदन में सियासी माहौल काफी गर्म हो गया।
नए मुख्यमंत्री और RSS को लेकर टिप्पणी
तेजस्वी यादव ( ने नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि भले ही बीजेपी का मुख्यमंत्री बन गया है, लेकिन RSS के लोग पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के कई वरिष्ठ और “मूल” नेता जैसे Giriraj Singh, Ashwini Choubey और Vijay Sinha मुख्यमंत्री पद तक नहीं पहुंच पाए, जिससे अंदरूनी असंतोष की स्थिति बन सकती है। इस बयान को राजनीतिक तौर पर काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर सत्ता पक्ष की एकजुटता पर सवाल उठाता है।
नीतीश कुमार और सरकार की स्थिरता पर सवाल
अपने संबोधन में तेजस्वी यादव ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि बीजेपी उन्हें लंबे समय तक मुख्यमंत्री नहीं रहने देगी। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान जो नारे लगाए जा रहे थे, वे केवल दिखावे के लिए थे। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने आखिरकार अपना एजेंडा लागू करते हुए नेतृत्व बदल दिया। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राज्य के विकास के लिए स्थिर सरकार जरूरी होती है, लेकिन बिहार में बार-बार सरकार बनने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। उनके अनुसार, पांच साल में कई बार सरकार बदलना अपने आप में एक बड़ी चिंता का विषय है।
सदन में हल्की नोकझोंक
भाषण के दौरान तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) ने सम्राट चौधरी को धन्यवाद भी दिया, लेकिन उनके अंदाज में हल्का व्यंग्य भी नजर आया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए खुशी की बात है कि सम्राट चौधरी “लालू की पाठशाला” से जुड़े रहे हैं। साथ ही उन्होंने मजाकिया लहजे में पगड़ी वाले बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उसे संभालकर रखें, क्योंकि उस पर अन्य नेताओं की नजर हो सकती है। इस टिप्पणी ने सदन में हल्की हंसी का माहौल भी बना दिया। हालांकि इसके पीछे तेजस्वी का राजनीतिक संदेश साफ था कि सत्ता के भीतर खींचतान जारी है। इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
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