AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने गुजरात के भुज में आयोजित एक जनसभा के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कहा कि जब तक देश में मुसलमानों को न्याय और बराबरी का हक नहीं मिलेगा, तब तक भारत का ‘विश्वगुरु’ बनने का सपना अधूरा ही रहेगा। असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि किसी भी देश की असली ताकत उसकी सामाजिक समानता और न्याय व्यवस्था में होती है। अगर अल्पसंख्यक खुद को सुरक्षित और बराबरी का हिस्सा महसूस नहीं करेंगे, तो विकास की बातें अधूरी ही रह जाएंगी। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं।
बीजेपी-कांग्रेस और RSS पर लगाए आरोप
अपने संबोधन में असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी, कांग्रेस और RSS पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सभी मिलकर उनकी पार्टी AIMIM के खिलाफ गलत धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं। असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी का उद्देश्य केवल लोकतंत्र को मजबूत करना और संविधान में जनता के विश्वास को बनाए रखना है। उन्होंने B. R. Ambedkar द्वारा बनाए गए संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बंधुत्व जैसे सिद्धांत तभी सार्थक होंगे जब हर वर्ग को उनका पूरा हक मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अल्पसंख्यकों को अपने नेतृत्व को मजबूत करना होगा, तभी वे अपनी स्थिति में सुधार ला पाएंगे।
AIMIM के कामों का जिक्र और विकास पर फोकस
असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाषण में AIMIM द्वारा किए गए कामों को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक मुसलमान केवल वोटर बनकर रह गए, जिसके कारण वे कई क्षेत्रों में पिछड़ गए। उन्होंने मुस्लिम बहुल इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की ओर ध्यान दिलाया। साथ ही हैदराबाद में AIMIM द्वारा संचालित अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी पार्टी जमीनी स्तर पर काम कर रही है। असदुद्दीन ओवैसी ने यह भी कहा कि उनकी कोशिश है कि समाज के कमजोर वर्गों को बेहतर सुविधाएं मिलें और वे मुख्यधारा में शामिल हो सकें।
मोदी सरकार और बुलडोजर कार्रवाई पर तीखा हमला
प्रधानमंत्री Narendra Modi और केंद्र सरकार की नीतियों पर भी असदुद्दीन ओवैसी ने खुलकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद कई ऐसे कानून बनाए गए हैं, जो भेदभावपूर्ण नजर आते हैं, जैसे नागरिकता संशोधन कानून (CAA)। इसके अलावा उन्होंने तीन तलाक कानून पर भी सवाल उठाए और कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गुजरात में बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी समुदाय के घर या धार्मिक स्थलों को गिराने से समाज में दूरी बढ़ती है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि देश संविधान के सिद्धांतों से चलेगा, न कि किसी ताकत के दबाव से। असदुद्दीन ओवैसी का यह पूरा बयान अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है और आने वाले दिनों में इस पर और प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।
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