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90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्यों दर्ज हुई FIR? कोर्ट के आदेश से मचा हड़कंप

मध्य प्रदेश के आगर मालवा में कथित फर्जी NDPS कार्रवाई मामले में राजस्थान की चौमहला कोर्ट ने दो TI समेत करीब 90 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं। जानिए पूरा विवाद और कोर्ट की गंभीर टिप्पणियां।

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मध्य प्रदेश और राजस्थान की सीमा से जुड़े एक बड़े मामले में अदालत के आदेश ने पुलिस विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है। राजस्थान की चौमहला कोर्ट ने कथित फर्जी NDPS कार्रवाई को गंभीर मानते हुए दो थाना प्रभारी समेत करीब 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। यह मामला मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले से जुड़ा है, जहां एक बड़ी ड्रग्स बरामदगी का दावा किया गया था। अब उसी कार्रवाई की वैधता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं, जिससे पूरे पुलिस तंत्र की कार्यशैली पर चर्चा तेज हो गई है।

 ‘बड़ी सफलता’ बनी विवाद की जड़

यह मामला जनवरी 2026 का बताया जा रहा है, जब आगर मालवा कोतवाली पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एमडी ड्रग्स, केमिकल और मशीनरी जब्त करने का दावा किया था। उस समय इसे पुलिस की बड़ी उपलब्धि बताया गया और दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था। लेकिन समय बीतने के साथ ही यह कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई। आरोप है कि पूरी छापेमारी प्रक्रिया नियमों के खिलाफ थी और इसे गलत तरीके से पेश किया गया। अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए, जिसके बाद कई खामियां सामने आईं।

 जांच में सामने आईं गंभीर प्रक्रियागत कमियां

जांच रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने पुलिस कार्रवाई पर संदेह पैदा कर दिया। आरोप है कि दूसरे राज्य में कार्रवाई करते समय आवश्यक सूचना यानी आमद-रवानगी दर्ज नहीं की गई थी। इसके अलावा रोजनामचा अपडेट न करने और स्थानीय पुलिस को सूचना न देने जैसे नियमों की अनदेखी भी सामने आई। सबसे अहम बात यह रही कि कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग, जो नियमों के अनुसार जरूरी होती है, वह भी नहीं की गई। पुलिस की ओर से यह तर्क दिया गया कि मोबाइल की बैटरी खत्म हो गई थी, लेकिन कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को संदिग्ध माना और इसे स्वीकार नहीं किया।

FIR के आदेश के बाद आगे की कानूनी जंग शुरू

कोर्ट के आदेश के बाद राजस्थान के डग थाने में 6 नामजद और करीब 90 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। मामले में कोतवाली आगर के थाना प्रभारी शशि उपाध्याय समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। फरियादी पक्ष ने इस फैसले को न्याय की जीत बताया है, जबकि पुलिस विभाग इसे चुनौती देने की तैयारी में है। थाना प्रभारी का कहना है कि वे इस आदेश के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे। फिलहाल यह मामला कानूनी लड़ाई के नए चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां आगे की जांच और भी अहम मानी जा रही है।

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