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 डीजल पर 14 और ATF पर 12.5 रुपये लीटर…  सरकार ने अचानक क्यों बढ़ाया एक्सपोर्ट टैक्स? आम जनता पर कितना पड़ेगा असर

केंद्र सरकार ने 16 जून 2026 से डीजल और ATF के निर्यात पर क्रमशः 14 रुपये और 12.5 रुपये प्रति लीटर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ा दी है। पेट्रोल पर कोई बदलाव नहीं हुआ। जानिए इसका कारण और आम जनता पर असर।

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केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम सेक्टर से जुड़े निर्यात शुल्क में बड़ा बदलाव करते हुए नया आदेश जारी किया है। 16 जून 2026 से लागू इस फैसले के तहत डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क बढ़ा दिया गया है। इस बदलाव के बाद डीजल के निर्यात पर 14 रुपये प्रति लीटर और ATF पर 12.5 रुपये प्रति लीटर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) लागू होगी। हालांकि पेट्रोल के निर्यात पर किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है और इसकी दर पहले की तरह 1.5 रुपये प्रति लीटर ही बनी रहेगी। इस फैसले के बाद पेट्रोलियम सेक्टर में नई चर्चा शुरू हो गई है।

 निर्यात पर रोक लगाने जैसा कदम क्यों लिया गया?

सरकारी सूत्रों के अनुसार यह फैसला देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और फ्यूल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे हालात में कई रिफाइनरी कंपनियां घरेलू बाजार की तुलना में निर्यात को अधिक लाभकारी मानने लगी थीं। इसी वजह से सरकार ने यह कदम उठाया है ताकि घरेलू आपूर्ति प्रभावित न हो और देश में ईंधन की कमी की स्थिति न बने। यह नीति विशेष रूप से ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।

 हर 15 दिन में समीक्षा, बाजार पर नजर बनाए सरकार

सरकार की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि पेट्रोलियम उत्पादों पर लगने वाली निर्यात ड्यूटी की समीक्षा हर 15 दिन में की जाती है। इसका आधार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और फ्यूल की औसत कीमतें होती हैं। पिछला संशोधन 1 जून 2026 को किया गया था और अब 16 जून से नई दरें लागू होंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक कीमतों में बदलाव का असर देश की आपूर्ति और कीमतों पर अनियंत्रित रूप से न पड़े। इस तरह सरकार समय-समय पर संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती है।

आम जनता पर कितना पड़ेगा असर?

सरकार ने साफ किया है कि यह बदलाव केवल निर्यात पर लागू होगा और घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। यानी पेट्रोल पंप पर आम उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में तत्काल कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल कंपनियों की रणनीति और सप्लाई चेन पर इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल यह कदम मुख्य रूप से घरेलू सप्लाई को स्थिर रखने और बाजार में असंतुलन रोकने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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