दुनियाभर में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का असर अब भारत की नीतियों पर भी दिखाई देने लगा है। केंद्र सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किया है। सरकार का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब वैश्विक स्तर पर तेल बाजार अस्थिर बना हुआ है और कई देशों के बीच बढ़ते तनाव से ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है। माना जा रहा है कि तेल की बढ़ती कीमतों से कंपनियों को होने वाले अतिरिक्त लाभ को संतुलित करने के लिए यह फैसला लिया गया है। नई टैक्स दरें 16 जुलाई से लागू कर दी गई हैं।
डीजल और विमान ईंधन पर बढ़ा बोझ
सरकार द्वारा जारी नए आदेश के अनुसार अब डीजल के निर्यात पर पहले से अधिक टैक्स देना होगा। इसी तरह विमानन क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले ATF पर भी शुल्क बढ़ाया गया है। दूसरी ओर पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में कटौती की गई है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार अलग-अलग ईंधनों की मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव का असर तेल कंपनियों की निर्यात रणनीति पर पड़ सकता है। साथ ही आने वाले समय में ईंधन कारोबार से जुड़े क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय तनाव ने बढ़ाई तेल बाजार की बेचैनी
हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित किया है। तेल आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्गों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। ऐसे माहौल में निवेशकों और व्यापारियों ने तेल की खरीद बढ़ा दी, जिससे कीमतों में तेजी देखने को मिली। जुलाई के दौरान कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बाजार जानकारों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द सामान्य नहीं हुए तो तेल की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि कई देशों की सरकारें ऊर्जा सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।
आगे भी हो सकते हैं बड़े बदलाव, सरकार रखे हुए है नजर
भारत सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति की समीक्षा करती है और उसी के आधार पर टैक्स दरों में बदलाव किए जाते हैं। पिछले कुछ महीनों में तेल की कीमतों में नरमी आने पर राहत दी गई थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं तो सरकार भविष्य में भी नए कदम उठा सकती है। फिलहाल सरकार का यह फैसला यह दिखाता है कि वह ऊर्जा क्षेत्र में होने वाले हर बदलाव पर करीब से नजर रख रही है। आने वाले दिनों में वैश्विक बाजार की दिशा तय करेगी कि तेल और ईंधन से जुड़े नियमों में आगे और क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।
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