दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान सामने आई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में अब सोशल मीडिया पर सक्रिय कई बड़े इन्फ्लुएंसर्स और यूट्यूबर्स जांच एजेंसियों के रडार पर बताए जा रहे हैं। पुलिस का फोकस उन अकाउंट्स पर है, जिनके जरिए कथित तौर पर ऐसे वीडियो, पोस्ट या लाइव प्रसारण किए गए, जिनसे भीड़ को उकसाने या भ्रामक जानकारी फैलाने का संदेह है। शुरुआती जांच के आधार पर डिजिटल सबूत जुटाए जा रहे हैं और संबंधित सोशल मीडिया गतिविधियों की विस्तार से जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून के अनुसार सभी पहलुओं की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
तीन निजी कंपनियों की भी भूमिका खंगाल रही पुलिस
मामले की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कर रही है। जांच के दौरान डिजिटल मार्केटिंग, सोशल मीडिया मैनेजमेंट और ऑनलाइन कंटेंट प्रमोशन से जुड़ी तीन निजी कंपनियों के दस्तावेज भी जांच के दायरे में लाए गए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या किसी संगठित तरीके से सोशल मीडिया पर ऐसा कंटेंट प्रसारित किया गया, जिसने प्रदर्शन को प्रभावित किया या माहौल को तनावपूर्ण बनाने में भूमिका निभाई। इसके अलावा वीडियो, पोस्ट, लाइव स्ट्रीम और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की तकनीकी जांच भी जारी है। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि किन-किन सोशल मीडिया अकाउंट्स की गतिविधियां संदिग्ध रही हैं और क्या उनके पीछे कोई समन्वित नेटवर्क काम कर रहा था।
पहले भी कई सोशल मीडिया अकाउंट्स जांच के दायरे में आ चुके हैं
सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी दिल्ली पुलिस लगभग 180 सोशल मीडिया हैंडल्स को कथित रूप से भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप में जांच के दायरे में ला चुकी है। अब मौजूदा जांच में उन अकाउंट्स की भी समीक्षा की जा रही है, जिनकी पोस्ट या वीडियो प्रदर्शन के दौरान तेजी से वायरल हुए थे। पुलिस यह स्पष्ट करना चाहती है कि सोशल मीडिया पर साझा किए गए कंटेंट और वास्तविक घटनाओं के बीच कोई सीधा संबंध था या नहीं। यदि किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका कानून के उल्लंघन में सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय जांच पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान हुई थी हिंसा, कई पहलुओं की हो रही जांच
जंतर-मंतर पर छात्रों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर हिंसा, पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने और सुरक्षाकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की जैसी घटनाएं भी सामने आई थीं। इसके बाद पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू की और अब डिजिटल साक्ष्यों को भी अहम आधार माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई केवल उपलब्ध सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हिंसा या अफवाह फैलाने में यदि किसी की भूमिका रही है तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कदम उठाए जाएं।
