बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां सम्राट चौधरी को एनडीए विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। यह पहली बार है जब बिहार में भारतीय जनता पार्टी का मुख्यमंत्री बनने जा रहा है, जो पार्टी के लिए एक अहम राजनीतिक उपलब्धि मानी जा रही है। सम्राट चौधरी 15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस फैसले के साथ ही भाजपा का दायरा और मजबूत हुआ है और अब देश के कुल 16 राज्यों में भाजपा के मुख्यमंत्री हो गए हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि पार्टी लगातार अपने राजनीतिक विस्तार को आगे बढ़ा रही है और कई राज्यों में मजबूत पकड़ बना चुकी है।
उत्तर से पश्चिम तक भाजपा का मजबूत नेटवर्क
अगर भाजपा शासित राज्यों की सूची पर नजर डालें तो इसमें उत्तर भारत से लेकर पश्चिम और पूर्वी भारत तक कई बड़े राज्य शामिल हैं। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ, हरियाणा में नायब सिंह सैनी, उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी और दिल्ली में रेखा गुप्ता जैसे चेहरे भाजपा की कमान संभाल रहे हैं। वहीं पश्चिम भारत में गुजरात के भूपेंद्र पटेल और महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस भी पार्टी के प्रमुख स्तंभ हैं। मध्य प्रदेश में मोहन यादव, राजस्थान में भजनलाल शर्मा और छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय जैसे नेता भाजपा के शासन को आगे बढ़ा रहे हैं। पूर्वी भारत में ओडिशा के मोहन चरण माझी और अब बिहार में सम्राट चौधरी का नाम इस सूची में जुड़ गया है। इससे साफ है कि भाजपा ने भौगोलिक रूप से देश के बड़े हिस्से में अपनी मौजूदगी मजबूत कर ली है।
मोदी युग का असर और बढ़ती राजनीतिक पकड़
2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा की राजनीतिक रणनीति और संगठनात्मक ताकत में बड़ा बदलाव देखा गया है। हरियाणा, असम, महाराष्ट्र और मणिपुर जैसे राज्यों में पहली बार भाजपा ने सत्ता हासिल की, जो पार्टी के विस्तार का संकेत है। 2017 में उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में भाजपा ने अपने दम पर सरकार बनाई, जो एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसके बाद 2024 में ओडिशा और अब 2026 में बिहार में भी पार्टी ने अपनी जगह बना ली है। यह लगातार बढ़ता ग्राफ दिखाता है कि भाजपा न सिर्फ पारंपरिक क्षेत्रों में मजबूत हो रही है, बल्कि नए राज्यों में भी अपनी पैठ बना रही है। सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
विपक्ष की स्थिति और बदलता राजनीतिक संतुलन
जहां एक तरफ भाजपा का दायरा बढ़ रहा है, वहीं कई राज्यों में अभी भी विपक्षी दलों की सरकारें बनी हुई हैं। दक्षिण भारत के ज्यादातर राज्यों जैसे कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना में विपक्ष का दबदबा है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में भी विपक्षी दल सत्ता में हैं। हालांकि, पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों जैसे मेघालय, नगालैंड और सिक्किम में भाजपा गठबंधन के जरिए सत्ता में शामिल है। आंध्र प्रदेश में भी सहयोगी दल की सरकार है जो केंद्र में भाजपा का समर्थन करती है। कुल मिलाकर देखा जाए तो देश की राजनीति अब दो बड़े धड़ों में बंटी नजर आ रही है, जहां भाजपा लगातार विस्तार कर रही है और विपक्ष अपने मजबूत क्षेत्रों में पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। आने वाले समय में यह सियासी संतुलन और दिलचस्प हो सकता है।
