बिहार में बड़े सियासी बदलाव के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऐसा बयान दिया है जिसने राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने सीधे किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन उनके शब्दों ने भारतीय जनता पार्टी पर सवाल जरूर खड़े कर दिए। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लिखा, “वो साथी नहीं शातिर है जो आपको छोटा बना दे, जिसके हक़दार हैं उससे नीचे की शपथ दिला दे।” इस शायराना अंदाज में दिए गए बयान को राजनीतिक विश्लेषक बीजेपी और उसके सहयोगियों पर तंज के रूप में देख रहे हैं। अखिलेश का यह बयान उस समय आया जब बिहार में नई सरकार के गठन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ हो चुकी है।
सम्राट चौधरी की शपथ से पहले गरमाई सियासत
बिहार में बीजेपी नेता Samrat Choudhary के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने से पहले ही विपक्ष ने माहौल को राजनीतिक रूप से गरमा दिया है। जानकारी के अनुसार, वह 14 अप्रैल को सुबह करीब 11 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं। यह पहली बार होगा जब बीजेपी का कोई नेता बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेगा। पार्टी ने किसी तरह का बड़ा सरप्राइज नहीं दिया और पहले से ही मजबूत दावेदार माने जा रहे सम्राट चौधरी को ही जिम्मेदारी सौंपी गई। बीजेपी विधायक दल और एनडीए के संयुक्त बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से नेता चुना गया। इस फैसले के बाद जहां बीजेपी खेमे में उत्साह है, वहीं विपक्ष इसे अलग नजरिए से देख रहा है और लगातार सवाल उठा रहा है कि क्या यह फैसला पूरी तरह राजनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर लिया गया है।
सम्राट चौधरी का लंबा सियासी सफर
सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने साल 2017 में बीजेपी का दामन थामा, लेकिन इससे पहले वे लंबे समय तक आरजेडी और जेडीयू जैसी पार्टियों से जुड़े रहे। शुरुआत में उन्होंने Rabri Devi की सरकार में मंत्री के रूप में काम किया। बाद में राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार उन्होंने कई बार दल बदले और अंततः बीजेपी में अपनी मजबूत पहचान बनाई। वह कोइरी समुदाय के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं, जिससे उन्हें सामाजिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर समर्थन मिला। बीजेपी में आने के बाद उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष, विधान परिषद सदस्य और फिर कैबिनेट मंत्री जैसी अहम जिम्मेदारियां मिलीं। मार्च 2023 में उन्हें बिहार बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत और बढ़ी।
परिवारिक विरासत और आगे की चुनौती
सम्राट चौधरी एक राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता Shakuni Choudhary भी बिहार की राजनीति का बड़ा नाम रहे हैं, जिन्होंने कांग्रेस से लेकर आरजेडी और जेडीयू तक कई दलों में काम किया। इस राजनीतिक विरासत का फायदा सम्राट चौधरी को मिला, लेकिन अब मुख्यमंत्री के रूप में उनके सामने चुनौतियां भी बड़ी हैं। बिहार जैसे राज्य में विकास, कानून-व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दे हमेशा केंद्र में रहते हैं। ऐसे में उनकी पहली परीक्षा यही होगी कि वे इन मुद्दों पर कितना प्रभावी काम कर पाते हैं। दूसरी तरफ, विपक्ष पहले से ही हमलावर है और अखिलेश यादव जैसे नेताओं के बयान यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति और भी दिलचस्प होने वाली है।
