पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी माहौल अब तेजी से गरमाता जा रहा है। इसी बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने 14 अप्रैल से राज्य में अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत करते हुए रायगंज में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। यह इस चुनावी सीजन में उनका पहला बड़ा कार्यक्रम था, जिसमें उन्होंने सीधे तौर पर सत्ताधारी Mamata Banerjee की पार्टी TMC और केंद्र की BJP पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने अपने भाषण में राज्य की आर्थिक स्थिति, रोजगार के अवसर और उद्योगों की हालत को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बंगाल, जो कभी उद्योगों का मजबूत केंद्र माना जाता था, अब रोजगार संकट से जूझ रहा है और इसके लिए मौजूदा सरकार जिम्मेदार है।
बेरोजगारी के मुद्दे पर घिरी टीएमसी
राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने अपने भाषण का सबसे बड़ा हिस्सा बेरोजगारी के मुद्दे पर केंद्रित रखा। उन्होंने दावा किया कि TMC ने 2021 के चुनाव में 5 लाख नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर यह वादा पूरा होता नजर नहीं आया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर कितने लोगों को वास्तव में रोजगार मिला और कितनी कंपनियां राज्य से बाहर चली गईं या बंद हो गईं। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि वर्तमान स्थिति यह है कि लाखों युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं और बड़ी संख्या में लोगों ने बेरोजगारी भत्ता पाने के लिए आवेदन किया है। उनके इस बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। कांग्रेस नेता ने यह संदेश देने की कोशिश की कि राज्य में रोजगार की स्थिति गंभीर है और सरकार इसे संभालने में विफल रही है।
उद्योगों की हालत पर बीजेपी और केंद्र पर भी वार
अपने संबोधन में राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने केवल राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि केंद्र की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस तरह राज्य में उद्योगों को नुकसान पहुंचा है, उसी तरह देशभर में भी छोटे और मध्यम उद्योग दबाव में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर विदेशी सामान बड़े पैमाने पर भारतीय बाजार में आता है, तो इससे स्थानीय उद्योगों को भारी नुकसान होगा। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि राज्य और केंद्र, दोनों स्तर पर गलत नीतियों के कारण उद्योग क्षेत्र कमजोर हुआ है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ राज्य सरकार पर उद्योगों को खत्म करने का आरोप है, तो दूसरी तरफ केंद्र की नीतियां भी उद्योगों को मजबूत करने में नाकाम रही हैं। इस तरह उन्होंने दोनों प्रमुख दलों को एक साथ घेरने की रणनीति अपनाई।
चुनावी मुकाबले में कांग्रेस की चुनौती
पश्चिम बंगाल में इस बार का चुनाव काफी दिलचस्प माना जा रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी, लेकिन इस बार पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। 294 सीटों वाले इस चुनाव में कांग्रेस ने लगभग सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं। हालांकि मुख्य मुकाबला अभी भी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच माना जा रहा है, लेकिन कांग्रेस अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश में जुटी है। राहुल गांधी के इस दौरे को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहां वे जनता के बीच जाकर पार्टी के मुद्दों को मजबूत करना चाहते हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस इस बार बंगाल की राजनीति में कोई बड़ा बदलाव ला पाती है या मुकाबला फिर से दो प्रमुख दलों के बीच ही सिमट कर रह जाता है।
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