पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में इजरायल के विदेश मंत्री Gideon Sa’ar ने भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar से फोन पर अहम बातचीत की। यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब Hormuz Strait में सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव चरम पर है। दोनों नेताओं के बीच ईरान, लेबनान और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता पर विस्तार से चर्चा हुई। इस संवाद को क्षेत्रीय हालात के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि भारत और इजरायल दोनों के आर्थिक और रणनीतिक हित इस इलाके से जुड़े हैं।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख
इजरायल के विदेश मंत्री ने बातचीत के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अपनी चिंता खुलकर जाहिर की। Gideon Sa’ar ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह बेहद जरूरी है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाए। उन्होंने इस दिशा में अमेरिका के सख्त रुख का समर्थन करते हुए कहा कि ईरान में यूरेनियम संवर्धन पर रोक और संवर्धित सामग्री को हटाना जरूरी कदम हैं। उनका मानना है कि अगर इस पर सख्ती नहीं बरती गई तो इससे वैश्विक सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। इस मुद्दे पर भारत की भूमिका भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि भारत का ईरान और खाड़ी देशों के साथ संतुलित संबंध रहा है।
नौवहन सुरक्षा और वैश्विक व्यापार पर चिंता
बातचीत में सबसे अहम मुद्दा Hormuz Strait में जहाजों की सुरक्षा को लेकर रहा। इजरायल की ओर से कहा गया कि इस क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है, जिससे वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है और यहां किसी भी तरह की बाधा से कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। भारत के लिए भी यह मार्ग बेहद अहम है, क्योंकि बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। ऐसे में भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए है और अपने हितों की सुरक्षा के लिए कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
भारत की कूटनीतिक सक्रियता और वैश्विक संतुलन
इस बातचीत से पहले भी S. Jaishankar ने कुवैत और सिंगापुर के अपने समकक्षों से संपर्क साधकर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की थी। कुवैत के विदेश मंत्री के साथ बातचीत में भारत ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी, जबकि सिंगापुर के साथ बातचीत में व्यापक वैश्विक प्रभावों पर चर्चा हुई। यह साफ संकेत है कि भारत इस संकट को लेकर सतर्क है और हर स्तर पर संवाद बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और गंभीर हो सकती है, ऐसे में भारत की संतुलित कूटनीति ही उसे इस संकट से सुरक्षित निकालने में मदद करेगी।
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