बॉलीवुड में जब भी किसी स्टार किड की एंट्री होती है, तो उसके साथ विरासत, दबाव और तुलना जैसे शब्द अपने आप जुड़ जाते हैं। अगस्त्य नंदा भी इससे अछूते नहीं हैं। फिल्म इक्कीस के जरिए सुर्खियों में आए Agastya Nanda ने हाल ही में अपने परिवार की विरासत को लेकर खुलकर बात की और एक ऐसा बयान दिया जिसने लोगों की सोच बदलने पर मजबूर कर दिया। IMDb के यूट्यूब चैनल पर शेयर किए गए एक वीडियो में जब निर्देशक श्रीराम राघवन ने उनसे पूछा कि क्या दिग्गज परिवार से होने के कारण उन पर कोई दबाव है, तो अगस्त्य ने बेहद सधे और आत्मविश्वास भरे शब्दों में जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि वह इस दबाव को बिल्कुल भी महसूस नहीं करते, क्योंकि उन्हें लगता है कि बच्चन या कपूर विरासत उनकी जिम्मेदारी नहीं है। अगस्त्य के अनुसार, उनका सरनेम नंदा इसलिए है क्योंकि वह सबसे पहले अपने पिता निखिल नंदा के बेटे हैं। उनका फोकस सिर्फ इस बात पर है कि वह अपने पिता को गर्व महसूस करा सकें। यही उनके लिए असली विरासत है, जिसे वह पूरी गंभीरता से लेते हैं।
परिवार से प्रेरणा, तुलना से दूरी
अगस्त्य नंदा ने न सिर्फ विरासत के दबाव को खारिज किया, बल्कि यह भी स्वीकार किया कि उनके परिवार के कई सदस्य बेहतरीन अभिनेता रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने परिवार के कलाकारों के काम की बहुत इज्जत करते हैं और उनकी तारीफ भी करते हैं, लेकिन खुद की तुलना उनसे नहीं करते। अगस्त्य का मानना है कि हर इंसान की अपनी एक अलग पहचान होती है और वह उसी पहचान को बनाने में विश्वास रखते हैं।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि वह कभी अपने परिवार के दिग्गज कलाकारों जैसे बन पाएंगे और इसी सोच में समय बर्बाद करना उन्हें सही नहीं लगता। अगस्त्य के इस बयान को इंडस्ट्री में एक परिपक्व सोच के रूप में देखा जा रहा है, जहां अक्सर स्टार किड्स पर तुलना का दबाव हावी रहता है। अगस्त्य श्वेता बच्चन और निखिल नंदा के बेटे हैं, अमिताभ और जया बच्चन के पोते हैं और अभिषेक बच्चन व ऐश्वर्या राय के भांजे हैं, लेकिन इसके बावजूद वह खुद को इन पहचान से ऊपर एक सामान्य कलाकार के तौर पर देखना चाहते हैं।
‘इक्कीस’ से बड़ा पर्दा, बड़ी जिम्मेदारी
फिल्म इक्कीस अगस्त्य नंदा के करियर की एक अहम कड़ी मानी जा रही है। यह फिल्म 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान लड़ी गई बसंतर की ऐतिहासिक लड़ाई पर आधारित है और सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के जीवन को पर्दे पर दिखाती है। अरुण खेत्रपाल ने महज 21 साल की उम्र में देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे, और इसी उम्र को फिल्म के टाइटल में दर्शाया गया है।
श्रीराम राघवन जैसे अनुभवी निर्देशक के साथ काम करना अगस्त्य के लिए एक बड़ा मौका है। फिल्म में उनके साथ जयदीप अहलावत जैसे दमदार अभिनेता भी अहम भूमिका में नजर आएंगे। अगस्त्य के लिए यह फिल्म सिर्फ एक अभिनय प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है, क्योंकि यह देश के एक वीर सपूत की कहानी को दर्शकों तक पहुंचाती है। ऐसे गंभीर विषय पर काम करना किसी भी युवा अभिनेता के लिए आसान नहीं होता, लेकिन अगस्त्य इस चुनौती को पूरे समर्पण के साथ स्वीकार करते नजर आ रहे हैं।
‘इक्कीस’ में इतिहास, भावना और सिनेमा का संगम
इक्कीस की एक और खास बात यह है कि इस फिल्म में दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी स्क्रीन अपीयरेंस देखने को मिलेगी। धर्मेंद्र का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है और उनकी आखिरी फिल्म का हिस्सा बनना इस प्रोजेक्ट को और भी भावनात्मक बना देता है।
फिल्म सिर्फ एक युद्ध कथा नहीं है, बल्कि यह बलिदान, साहस और देशभक्ति की भावना को दर्शाती है। अगस्त्य नंदा जैसे युवा अभिनेता के लिए इस तरह की फिल्म से पहचान बनाना एक मजबूत शुरुआत मानी जा रही है। दर्शकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या अगस्त्य अपने दम पर खुद को साबित कर पाएंगे। हालांकि उनके बयानों से यह साफ है कि वह किसी विरासत के बोझ के साथ नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।
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