राजस्थान के बाड़मेर जिले में मंगलवार को उस समय बड़ा हंगामा खड़ा हो गया, जब शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सैकड़ों मजदूरों के बीच खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। यह घटना कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर उस दौरान हुई, जब गिरल लिग्नाइट माइंस से जुड़े मजदूर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। अचानक विधायक के इस कदम से वहां मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि पुलिसकर्मियों ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए उन्हें रोक लिया, जिससे बड़ी दुर्घटना टल गई। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बन गया। प्रदर्शन कर रहे मजदूरों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और आरोप लगाया कि उनकी समस्याओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिस पर लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
‘मारना है तो मुझे मारो’ कहकर सरकार पर बरसे भाटी
खुद पर पेट्रोल छिड़कते हुए विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार पर मजदूरों को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “अगर मारना है तो मुझे मारो, मजदूरों को क्यों परेशान किया जा रहा है?” उनके इस बयान के बाद प्रदर्शनकारी और ज्यादा आक्रोशित हो गए। बताया जा रहा है कि गिरल लिग्नाइट माइंस क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण के बाद स्थानीय लोगों को रोजगार देने का वादा किया गया था, लेकिन वर्षों बीतने के बावजूद बड़ी संख्या में युवाओं को स्थायी नौकरी नहीं मिल सकी। वहीं कई मजदूरों को काम से हटाए जाने की भी शिकायत सामने आई है। इसी मुद्दे को लेकर पिछले 39 दिनों से आंदोलन चल रहा है। मजदूरों का कहना है कि कंपनी और प्रशासन दोनों उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं। विधायक भाटी भी पिछले कई दिनों से मजदूरों के समर्थन में धरना स्थल पर मौजूद थे और लगातार सरकार पर दबाव बना रहे थे। मंगलवार को उन्होंने प्रेस वार्ता में भी चेतावनी दी थी कि यदि मजदूरों की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
39 दिनों से जारी आंदोलन, रोजगार को लेकर बढ़ी नाराजगी
गिरल लिग्नाइट माइंस से जुड़े इस आंदोलन की शुरुआत 9 अप्रैल से हुई थी। आंदोलन कर रहे लोगों का आरोप है कि राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड ने स्थानीय परिवारों से जमीन लेने के दौरान रोजगार देने का भरोसा दिलाया था। लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि स्थानीय युवाओं को नौकरी में प्राथमिकता नहीं मिल रही। प्रदर्शनकारी मजदूरों की मांग है कि कंपनी 8 घंटे की तय ड्यूटी व्यवस्था लागू करे और जिन लोगों से रोजगार का वादा किया गया था, उन्हें तुरंत काम दिया जाए। इसके अलावा स्थानीय युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता देने की भी मांग की जा रही है। मजदूर संगठनों का कहना है कि लंबे समय से शांतिपूर्ण आंदोलन करने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी नाराजगी के चलते मंगलवार को बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट घेराव के लिए पहुंचे थे। आंदोलन में महिलाओं और युवाओं की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि अब यह सिर्फ रोजगार का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई बन चुका है।
प्रशासन सतर्क, राजनीतिक माहौल भी गरमाया
विधायक रविंद्र सिंह भाटी के इस कदम के बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। अधिकारियों ने स्थिति संभालने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया और विधायक को तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। फिलहाल प्रशासन प्रदर्शनकारियों से बातचीत के जरिए मामला शांत कराने की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर इस घटना ने राजस्थान की राजनीति में भी हलचल बढ़ा दी है। विपक्षी दल सरकार पर मजदूर विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से अभी तक कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सोशल मीडिया पर भी यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। कई लोग विधायक के कदम को मजदूरों के समर्थन में बड़ा संदेश बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे भावनात्मक और जोखिम भरा कदम मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज हो सकता है, क्योंकि मजदूर संगठन अब आरपार की लड़ाई की बात कर रहे हैं। फिलहाल सभी की नजर प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
