नगीना–बढ़ापुर रोड स्थित गांव नंदपुर इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। गांव के नंदलाल देवता महाराज मंदिर परिसर में एक कुत्ता पिछले छह दिनों से लगातार मंदिर की परिक्रमा करता नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि कुत्ता न तो थकता दिख रहा है और न ही परिक्रमा का क्रम तोड़ रहा है। सुबह से शाम तक वह मंदिर के चारों ओर घूमता रहता है। इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग नंदपुर पहुंच रहे हैं। गांव में आस्था और जिज्ञासा का ऐसा माहौल बन गया है कि हर कोई यही जानना चाहता है कि आखिर यह कुत्ता ऐसा क्यों कर रहा है।
एनिमल सेल्टर टीम ने संभाली जिम्मेदारी
लगातार परिक्रमा कर रहे कुत्ते को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन की चिंता उसके स्वास्थ्य को लेकर बढ़ने लगी। इसी को देखते हुए बिजनौर जिले के गांव पेदा से प्रेमपथ एनिमल सेल्टर की टीम नंदपुर पहुंची। टीम में शामिल पशु चिकित्सक डॉ. संध्या रस्तौगी, डॉ. अश्वनी चित्रांश और विशाल ने मंदिर परिसर में ही डेरा डाल लिया। टीम ने कुत्ते का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण शुरू किया और उसे थोड़ी-थोड़ी देर में भोजन भी कराया जा रहा है। चिकित्सकों का कहना है कि फिलहाल कुत्ता सामान्य दिख रहा है, लेकिन लगातार एक ही गतिविधि में लगे रहने के कारण निगरानी बेहद जरूरी है। टीम के अनुसार यह कहना मुश्किल है कि कुत्ता परिक्रमा क्यों कर रहा है, लेकिन उसकी देखभाल में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है।
पहले भी हो चुका परीक्षण, रेबीज के लक्षण नहीं पाए गए
इससे पहले भी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रजनीश कुमार के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम गांव नंदपुर पहुंच चुकी है। जांच के दौरान कुत्ते में रेबीज जैसे किसी भी खतरनाक बीमारी के लक्षण नहीं पाए गए। डॉ. रजनीश कुमार के अनुसार कुत्ता शारीरिक रूप से स्वस्थ है और उसका व्यवहार फिलहाल असामान्य जरूर है, लेकिन घातक नहीं लगता। उन्होंने बताया कि कुत्ते की मानसिक या न्यूरोलॉजिकल स्थिति को समझने के लिए एमआरआई कराना जरूरी होगा, लेकिन जिले में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर कुत्ते को गाजियाबाद ले जाकर विस्तृत जांच कराई जा सकती है। फिलहाल विशेषज्ञों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है।
दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, 60 हजार से ज्यादा लोग पहुंच चुके
कुत्ते की परिक्रमा की खबर फैलते ही नंदपुर गांव में लोगों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। अब तक 60 हजार से अधिक लोग मंदिर और कुत्ते के दर्शन कर चुके हैं। ग्रामीणों ने आने वाले श्रद्धालुओं और दर्शकों की सेवा के लिए मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन शुरू कर दिया है। दूध, खीर, हलवा और अन्य प्रसाद वितरण किया जा रहा है। गांव में दिनभर चहल-पहल बनी रहती है। कुछ लोग इसे आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे एक अनोखी प्राकृतिक घटना मान रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले चिकित्सकीय जांच और तथ्यों पर ध्यान देना जरूरी है। फिलहाल पूरा क्षेत्र इसी रहस्य में उलझा हुआ है कि आखिर यह कुत्ता मंदिर की परिक्रमा क्यों कर रहा है।
