तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सत्ता संभालने के बाद पहली बार केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। विजय ने कहा कि आम जनता पहले से महंगाई की मार झेल रही है और ऐसे समय में ईंधन के दाम बढ़ाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने केंद्र सरकार से तुरंत इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। मुख्यमंत्री विजय का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव खत्म होने के कुछ दिनों बाद देशभर में पेट्रोल और डीजल के दामों में करीब तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। राजनीतिक जानकार इसे विजय सरकार की ओर से केंद्र के खिलाफ पहला बड़ा राजनीतिक संदेश मान रहे हैं।
चुनाव खत्म होते ही बढ़े दाम
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर हमला बोल रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनता की नाराजगी से बचने के लिए सरकार ने ईंधन के दाम स्थिर रखे और जैसे ही चुनाव खत्म हुए, कीमतें बढ़ा दी गईं। तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के नतीजे 4 मई को घोषित हुए थे। इसके ठीक 11 दिन बाद यानी 15 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई। इसी बात को लेकर विपक्ष सरकार की मंशा पर सवाल उठा रहा है। मुख्यमंत्री विजय ने भी कहा कि आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना ठीक नहीं है और केंद्र को जनता की परेशानियों को समझना चाहिए। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में ईंधन के दाम बढ़ने से हर चीज महंगी हो जाएगी।
राहुल गांधी ने भी सरकार को घेरा
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि गलती सरकार की है लेकिन कीमत जनता चुका रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अभी तीन रुपये का झटका दिया गया है और बाकी वसूली आगे किस्तों में हो सकती है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने दावा किया कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन महंगा होगा, जिसका असर सीधे खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान पर पड़ेगा। राजनीतिक दलों का कहना है कि इससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों की मुश्किलें और बढ़ेंगी। सोशल मीडिया पर भी लोग लगातार बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
वैश्विक तनाव का असर या राजनीतिक फैसला?
केंद्र सरकार की ओर से ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक कारण बताए जा रहे हैं। हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। इसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ा है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात ही वजह थे तो चुनावों के दौरान कीमतें क्यों नहीं बढ़ाई गईं। यही सवाल अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर आने वाले दिनों में बाजार और आम लोगों की जेब दोनों पर दिखाई देगा। वहीं मुख्यमंत्री विजय के इस बयान ने साफ कर दिया है कि उनकी सरकार केंद्र के फैसलों पर खुलकर अपनी राय रखने वाली है। आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच सियासी टकराव और तेज हो सकता है।
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