बिहार की राजनीति में शनिवार को एक अहम फैसला सामने आया, जिसने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। राज्य के गृह विभाग की विशेष शाखा ने पूर्व मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar को जेड श्रेणी (Z Security) की सुरक्षा देने का ऐलान किया है। इसी के साथ भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता Vijay Kumar Sinha को भी जेड सिक्योरिटी दी गई है, जबकि जेडीयू के अनुभवी नेता Shravan Kumar को एस्कॉर्ट के साथ वाई प्लस (Y+) सुरक्षा प्रदान की गई है। यह निर्णय राज्य सुरक्षा समिति की बैठक में लिया गया, जो 17 अप्रैल को आयोजित हुई थी।
विजय सिन्हा की सुरक्षा घटी
इस फैसले में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि विजय कुमार सिन्हा की सुरक्षा श्रेणी पहले जेड प्लस (Z+) थी, जिसे अब घटाकर जेड कर दिया गया है। वहीं, हाल ही में बिहार सरकार ने उपमुख्यमंत्री Vijay Kumar Choudhary और Bijendra Prasad Yadav की सुरक्षा भी बढ़ाई थी और उन्हें जेड कैटेगरी में शामिल किया गया था। सुरक्षा स्तर में इस तरह के बदलाव को राज्य की राजनीतिक और प्रशासनिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। खासतौर पर कैबिनेट विस्तार के बाद नेताओं की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के अनुसार सुरक्षा में फेरबदल की संभावना भी जताई जा रही है।
बिना पद के भी हाई सिक्योरिटी
सबसे ज्यादा चर्चा Nishant Kumar को मिली जेड सुरक्षा को लेकर हो रही है, क्योंकि वह फिलहाल सरकार में किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं। हालांकि, एनडीए सरकार के गठन से पहले उनके डिप्टी सीएम बनने की अटकलें जरूर लगी थीं, लेकिन बाद में यह संभव नहीं हो पाया। बताया जा रहा है कि निशांत फिलहाल सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका को मजबूत करने पर ध्यान दे रहे हैं और पार्टी संगठन के साथ लगातार काम कर रहे हैं। वे जेडीयू कार्यालय में नियमित रूप से आ रहे हैं और आने वाले समय में बिहार के विभिन्न हिस्सों का दौरा भी कर सकते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर यह फैसला एहतियात के तौर पर लिया गया माना जा रहा है।
सुरक्षा फैसलों के राजनीतिक मायने
राज्य में नेताओं की सुरक्षा बढ़ाने या घटाने के फैसले अक्सर राजनीतिक संकेत भी देते हैं। निशांत कुमार (Nishant Kumar) को जेड सुरक्षा मिलना उनके बढ़ते राजनीतिक कद का संकेत हो सकता है। वहीं, अन्य नेताओं की सुरक्षा में बदलाव यह दिखाता है कि सरकार अपने स्तर पर संभावित जोखिमों और जिम्मेदारियों का आकलन कर रही है। आने वाले समय में बिहार की राजनीति में क्या नया मोड़ आएगा, यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, इस फैसले ने यह जरूर साफ कर दिया है कि राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार सतर्क है और परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय ले रही है।
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