हरियाणा के रेवाड़ी जिले के काठूवास गांव का माहौल उस वक्त गम में डूब गया, जब 22 वर्षीय अंशु का पार्थिव शरीर करीब छह महीने बाद उसके घर पहुंचा। अंशु बड़े सपनों के साथ रूस एमबीए की पढ़ाई करने गया था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। गांव में जैसे ही उसका शव पहुंचा, पूरे इलाके में सन्नाटा छा गया। परिवार के लोग बेसुध नजर आए और अंतिम संस्कार के दौरान हर आंख नम थी। अंशु के माता-पिता ने कभी सोचा भी नहीं था कि जिस बेटे को उन्होंने उज्जवल भविष्य के लिए विदेश भेजा, वह इस तरह वापस लौटेगा।
बहला-फुसलाकर सेना में भर्ती, फिर भेजा गया फ्रंट लाइन पर
अंशु के पिता राकेश कुमार, जो चंडीगढ़ रोडवेज में कार्यरत हैं, ने बताया कि उनका बेटा 30 अप्रैल 2025 को रूस गया था। वहां पहुंचने के बाद हालात अचानक बदल गए। अंशु और उसके साथ गए कई अन्य युवाओं को कथित तौर पर बहला-फुसलाकर सेना में भर्ती कर लिया गया। परिवार को पहले यह बताया गया कि उन्हें केवल सपोर्ट या बैकएंड का काम दिया जाएगा, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें सीधे युद्ध के मोर्चे पर भेज दिया गया। यह जानकारी परिवार के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। अंशु जैसे कई युवाओं के साथ ऐसा होने की आशंका ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।
15 सेकंड की आखिरी कॉल और फिर हमेशा के लिए खामोशी
18 अक्टूबर 2025 को, धनतेरस से ठीक दो दिन पहले, अंशु ने अपने कमांडर के फोन से घर पर एक वीडियो कॉल की। यह कॉल केवल 15 सेकंड की थी, लेकिन वही उसके परिवार के लिए आखिरी याद बन गई। उस छोटे से कॉल में भी उसकी आवाज में डर और बेचैनी साफ झलक रही थी। इसके बाद परिवार का उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया। कई महीनों तक परिवार उम्मीद में बैठा रहा कि शायद उनका बेटा लौट आएगा या उसकी कोई खबर मिलेगी, लेकिन समय बीतता गया और चिंता बढ़ती गई।
छह महीने बाद मिला सच, टूटा परिवार
अंशु से संपर्क टूटने के बाद परिवार ने हर संभव कोशिश की। उन्होंने सरकारी विभागों, नेताओं और संबंधित एजेंसियों से मदद मांगी। इस साल 2 अप्रैल को उन्हें आश्वासन मिला कि जल्द ही अंशु के बारे में जानकारी दी जाएगी। लेकिन 4 अप्रैल को जो खबर आई, उसने पूरे परिवार को तोड़ दिया। उन्हें बताया गया कि अंशु की मौत अक्टूबर 2025 में ही हो चुकी थी। इसके बाद उसके शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हुई। आखिरकार जब पार्थिव शरीर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा और फिर गांव लाया गया, तो पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। इस घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ा, बल्कि विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाले युवाओं की सुरक्षा पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
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