Homeउत्तर प्रदेश15 मेडल जीतने वाली चैंपियन खेत में काट रही फसल, तान्या चौधरी...

15 मेडल जीतने वाली चैंपियन खेत में काट रही फसल, तान्या चौधरी की कहानी करेगी हैरान

बागपत की एशियन चैंपियन हैमर थ्रो खिलाड़ी तान्या चौधरी ने 8 गोल्ड समेत 15 से ज्यादा मेडल जीते हैं। सफलता के बाद भी खेत में फसल काटकर परिवार का साथ दे रही हैं।

-

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के गांधी गांव की रहने वाली तान्या चौधरी आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। साधारण किसान परिवार से आने वाली तान्या ने मेहनत और लगन के दम पर खेल जगत में अपनी अलग पहचान बनाई है। हैमर थ्रो जैसे कठिन खेल में उन्होंने अब तक आठ स्वर्ण पदक समेत 15 से अधिक मेडल जीतकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। तान्या की सफलता इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने सीमित संसाधनों के बीच रहकर यह मुकाम हासिल किया। गांव की मिट्टी से निकली इस खिलाड़ी ने दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो किसी भी मुश्किल को हराया जा सकता है। आज बागपत ही नहीं, पूरे प्रदेश के लोग उनकी उपलब्धियों पर गर्व महसूस कर रहे हैं।

नीरज चोपड़ा से मिली प्रेरणा, हार के बाद नहीं मानी हार

तान्या चौधरी ने वर्ष 2016 में अपने घर से ही हैमर थ्रो की तैयारी शुरू की थी। शुरुआत में उनके पास बेहतर सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। साल 2020 में उन्होंने प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जहां उन्हें कोई पदक नहीं मिला। यह समय उनके लिए चुनौती भरा था, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को और मजबूत बनाया। इसी दौरान स्टार खिलाड़ी नीरज चोपड़ा की सफलता से उन्हें नई प्रेरणा मिली। उन्होंने लगातार अभ्यास किया और अपने खेल को बेहतर बनाया। मेहनत का परिणाम वर्ष 2025 में सामने आया, जब उन्होंने खेलो इंडिया प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। इसके बाद उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित कर दी।

मेडल जीतने के बाद भी नहीं बदला स्वभाव

आज जब तान्या चौधरी के नाम कई मेडल दर्ज हैं, तब भी उनका जीवन बेहद साधारण है। सफलता मिलने के बाद भी उन्होंने अपने परिवार और गांव से जुड़ाव नहीं छोड़ा। जब वह प्रतियोगिताओं से घर लौटती हैं तो आराम करने के बजाय परिवार का हाथ बंटाती नजर आती हैं। इन दिनों गेहूं की कटाई का समय है और तान्या खेत में परिवार के साथ फसल काट रही हैं। इसके अलावा वह अपनी माता के साथ घर के कामों और खाना बनाने में भी मदद करती हैं। यही सादगी उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। गांव के लोग बताते हैं कि तान्या हमेशा जमीन से जुड़ी रहती हैं और हर किसी से सम्मान के साथ बात करती हैं। यही वजह है कि लोग उन्हें खिलाड़ी ही नहीं, संस्कारी बेटी के रूप में भी देखते हैं।

अब कॉमनवेल्थ गेम्स पर नजर

तान्या चौधरी का सफर अभी रुका नहीं है। उनका अगला बड़ा सपना कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए पदक जीतना है। इसके लिए वह लगातार कड़ी मेहनत कर रही हैं। बेहतर प्रशिक्षण पाने के लिए वह रोजाना करीब 25 किलोमीटर दूर डौलचा गांव जाकर अभ्यास करती थीं, जहां कोच सचिन यादव ने उन्हें ट्रेनिंग दी। इसके अलावा वह दिल्ली में भी अभ्यास कर चुकी हैं, ताकि अपने प्रदर्शन को और मजबूत बना सकें। तान्या का कहना है कि उनका लक्ष्य सिर्फ मेडल जीतना नहीं, बल्कि देश का तिरंगा अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऊंचा करना है। गांव की इस बेटी की कहानी बताती है कि मेहनत, अनुशासन और परिवार के संस्कार इंसान को बड़ी ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। आने वाले समय में तान्या चौधरी भारत के लिए बड़ी उपलब्धि ला सकती हैं।

Read more-इंस्टाग्राम मैसेज से शुरू हुआ विवाद अब कोर्ट तक पहुंचा, चहल ने तानिया को क्यों भेजा कानूनी नोटिस?

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

Stay Connected

0FansLike
0FollowersFollow
0FollowersFollow
0SubscribersSubscribe

Latest posts