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निशांत कुमार नें क्योंं ठुकराया डिप्टी CM का पद? वजह बताते हुए कहा- “पिताजी ने जो 20 साल में किया है उसे…”

निशांत कुमार ने डिप्टी सीएम बनने पर तोड़ी चुप्पी, कहा- पिताजी के अधूरे सपने पूरे करेंगे। जानिए क्यों नहीं शामिल हुए सरकार में।

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बिहार की नई सरकार बनने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम को लेकर हो रही थी, वह था निशांत कुमार (Nishant Kumar)। अटकलें थीं कि वे सरकार में शामिल होकर डिप्टी सीएम बन सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। गुरुवार को जब निशांत कुमार जेडीयू कार्यालय पहुंचे, तो मीडिया ने उनसे इसी मुद्दे पर सवाल किए। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर कोई जवाब देने से परहेज किया और सवालों को टालते नजर आए। उनके इस रवैये ने राजनीतिक हलकों में और ज्यादा उत्सुकता पैदा कर दी है कि आखिर उन्होंने पद क्यों नहीं लिया।

Nishant Kumar का बड़ा  बयान

मीडिया से बातचीत के दौरान निशांत कुमार (Nishant Kumar) ने साफ कहा कि उनका ध्यान फिलहाल संगठन को मजबूत करने पर है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार ने पिछले 20 वर्षों में जो काम किया है, उसे वे जनता तक पहुंचाने की कोशिश करेंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके पिता के जो अधूरे सपने हैं, उन्हें पूरा करना ही उनकी प्राथमिकता है। इस बयान से साफ संकेत मिला कि फिलहाल वे सत्ता से ज्यादा संगठनात्मक जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं। हालांकि, उन्होंने राजनीति में अपनी भविष्य की भूमिका को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया।

शपथ समारोह में भी रहे गैरमौजूदगी 

निशांत कुमार (Nishant Kumar) की गैरमौजूदगी ने उस वक्त भी चर्चा को हवा दी, जब नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में वे नजर नहीं आए। इस समारोह में सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि जेडीयू के नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। इसके बावजूद निशांत का कार्यक्रम में शामिल न होना कई सवाल खड़े कर गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दूरी के पीछे कोई रणनीति हो सकती है या फिर वे अभी सक्रिय राजनीति में बड़ी भूमिका लेने से बचना चाहते हैं।

संगठन में रहते  है सक्रिय

हालांकि, सरकार में शामिल न होने के बावजूद निशांत कुमार (Nishant Kumar) पार्टी गतिविधियों में लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। वे जेडीयू कार्यालय में कार्यकर्ताओं और नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं और संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। उनके समर्थक भी उन्हें भविष्य के नेता के तौर पर देख रहे हैं और उनके समर्थन में नारे लगा रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या निशांत फिलहाल खुद को तैयार कर रहे हैं और सही समय का इंतजार कर रहे हैं? या फिर वे सच में राजनीति के संगठनात्मक पक्ष पर ही ध्यान देना चाहते हैं। आने वाले समय में ही यह साफ हो पाएगा कि उनकी भूमिका किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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