लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने जोरदार भाषण दिया, जिसमें उन्होंने महिलाओं की भूमिका और उनके योगदान को खास तौर पर रेखांकित किया। पीएम मोदी ने कहा कि देश की प्रगति में महिलाओं की भागीदारी पहले से ही अहम रही है, लेकिन अब समय आ गया है कि उनकी भूमिका को और मजबूत किया जाए। पीएम ने सभी दलों से अपील की कि इस बिल को राजनीति से ऊपर उठकर देखा जाए और इसे सर्वसम्मति से पारित किया जाए। उनके अनुसार, यह सिर्फ एक कानून नहीं बल्कि देश के भविष्य से जुड़ा फैसला है, जो महिलाओं को राजनीति में बराबरी का अवसर देगा।
‘काला टीका’ बयान से विपक्ष पर तंज
अपने भाषण के अंत में पीएम मोदी ने विपक्ष पर हल्का लेकिन तीखा कटाक्ष किया, जो अब चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत में जब भी कोई शुभ काम होता है, तो नजर से बचाने के लिए ‘काला टीका’ लगाया जाता है। इसी संदर्भ में उन्होंने विपक्ष की ओर इशारा करते हुए कहा, “मैं आपका धन्यवाद करता हूं काला टीका लगाने के लिए।” इस बयान को राजनीतिक तंज के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि कई विपक्षी दल इस विधेयक पर सवाल उठा रहे हैं। पीएम का यह अंदाज दर्शाता है कि वे विरोध को भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं, लेकिन साथ ही यह संदेश भी देना चाहते हैं कि यह बिल किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि पूरे देश का है।
‘क्रेडिट आप ले लो’—पीएम का बड़ा ऑफर
पीएम मोदी ने अपने भाषण में एक और अहम बात कही, जिसने सभी का ध्यान खींचा। उन्होंने साफ कहा कि सरकार को इस बिल का श्रेय लेने की कोई जरूरत नहीं है। पीएम ने विपक्ष से कहा कि अगर वे चाहें तो इस फैसले का पूरा क्रेडिट ले सकते हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि बिल पारित होने के बाद वे विज्ञापन देकर सभी दलों का धन्यवाद करने को तैयार हैं और उनकी तस्वीरें भी प्रकाशित करवा सकते हैं। यह बयान एक तरह से विपक्ष को साथ आने का निमंत्रण था, ताकि इस ऐतिहासिक फैसले को मिलकर आगे बढ़ाया जा सके। पीएम का कहना था कि यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि देशहित में एकजुट होने का है।
‘गारंटी’ के साथ दिया भरोसा
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया में किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि चाहे देश का कोई भी हिस्सा हो—उत्तर, दक्षिण, पूर्व या पश्चिम—सभी के साथ समान व्यवहार किया जाएगा। पीएम ने भरोसा दिलाया कि परिसीमन और अन्य प्रक्रियाएं निष्पक्ष तरीके से होंगी और पुराने अनुपात का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा, “अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं।” इस बयान के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार की मंशा साफ है और वह इस बिल को ईमानदारी से लागू करना चाहती है।
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