बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने के बाद हलचल तेज हो गई है। सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही विपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अंदर मतभेद का मुद्दा उठाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस का दावा है कि बीजेपी की राज्य इकाई में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है। पहले जहां सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा उपमुख्यमंत्री के रूप में साथ काम कर रहे थे, वहीं नई सरकार में दोनों डिप्टी सीएम पद जेडीयू के पास चले गए हैं। इस बदलाव के बाद से ही राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या पार्टी के अंदर असंतोष पनप रहा है।
कांग्रेस का आरोप—‘अंदर ही अंदर बन रही विस्फोटक स्थिति’
कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने BJP पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के अंदरखाने में असंतोष साफ दिखाई दे रहा है और आने वाले समय में यह खुलकर सामने आ सकता है। उनके मुताबिक, विजय सिन्हा के हालिया बयान इस बात का संकेत देते हैं कि संगठन के भीतर कुछ नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस का दावा है कि जिन नेताओं ने वर्षों तक पार्टी के लिए काम किया, उन्हें अब किनारे किया जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है। वर्धन ने यह भी कहा कि यह स्थिति आगे चलकर बड़े राजनीतिक विभाजन का रूप ले सकती है।
विजय सिन्हा के बयान से बढ़ी चर्चा
राजनीतिक विवाद की शुरुआत उस बयान से हुई, जिसमें विजय कुमार सिन्हा ने कहा था कि उन्होंने “कमांडर के आदेश” पर सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा। इस बयान को लेकर अब कई तरह के अर्थ निकाले जा रहे हैं। सिन्हा ने यह भी कहा था कि उन्होंने पार्टी के लिए वर्षों तक मेहनत की, संघर्ष किया और बलिदान दिया, लेकिन जब नेतृत्व का फैसला आया तो उन्होंने संगठन के आदेश का पालन किया। कांग्रेस इसी बयान को आधार बनाकर BJP के अंदर असंतोष की बात कह रही है। हालांकि, बीजेपी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा? सियासत में बढ़ सकता है तनाव
बिहार की राजनीति में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गर्मा सकता है। एक तरफ कांग्रेस इसे बीजेपी के अंदरूनी संकट के रूप में पेश कर रही है, वहीं BJP इसे सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया बता सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता परिवर्तन के बाद इस तरह की अटकलें आम होती हैं, लेकिन असली स्थिति आने वाले समय में ही साफ होगी। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीजेपी इस कथित असंतोष को संभाल पाती है या विपक्ष के आरोपों को और बल मिलता है। बिहार की सियासत में यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
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