इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर गुरुवार को एक गंभीर ग्राउंड हादसा होते-होते टल गया, जब स्पाइसजेट का एक विमान टैक्सी करते समय अकासा एयर के खड़े विमान से टकरा गया। यह घटना दोपहर के समय हुई, जब एयरपोर्ट पर सामान्य रूप से विमानों की आवाजाही जारी थी। टक्कर के बाद एयरपोर्ट पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई यात्री या क्रू सदस्य घायल नहीं हुआ। लेकिन इस घटना ने देश के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट्स में से एक पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
टैक्सी वे पर हुई टक्कर
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, स्पाइसजेट का बोइंग 737-700 विमान रनवे की ओर बढ़ रहा था और टैक्सी वे पर धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था। इसी दौरान वहां पहले से खड़ा अकासा एयर का विमान उड़ान भरने की तैयारी में था। जैसे ही स्पाइसजेट का विमान मोड़ लेने लगा, दूरी का सही अंदाजा नहीं लग पाया और उसके विंगलेट ने अकासा एयर के विमान के पिछले हिस्से को टक्कर मार दी। इस टक्कर में अकासा एयर के विमान का हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जो उड़ान के दौरान संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद अहम हिस्सा होता है। वहीं स्पाइसजेट के विमान का पंख भी नुकसान की चपेट में आ गया।
यात्रियों को दूसरी व्यवस्था से भेजा गया
इस हादसे के बाद अकासा एयर की दिल्ली से हैदराबाद जाने वाली फ्लाइट QP 1406 को तुरंत रद्द कर दिया गया। एयरलाइन ने यात्रियों को सुरक्षित विमान से उतारा और उनके लिए वैकल्पिक फ्लाइट की व्यवस्था की गई। एयरलाइन के प्रवक्ता ने साफ किया कि उनका विमान पूरी तरह स्थिर था और सभी सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा था। वहीं स्पाइसजेट ने भी इस घटना पर खेद जताते हुए कहा कि मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल दोनों विमानों को एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया है और उनकी तकनीकी जांच के बाद ही अगली उड़ान की अनुमति दी जाएगी।
DGCA ने शुरू की जांच
घटना के तुरंत बाद नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती जांच में यह देखा जा रहा है कि क्या यह मानव त्रुटि थी या ग्राउंड स्टाफ और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के बीच तालमेल की कमी के कारण यह हादसा हुआ। व्यस्त एयरपोर्ट्स पर इस तरह की घटनाएं बहुत गंभीर मानी जाती हैं, क्योंकि छोटी सी गलती भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इस घटना के बाद ग्राउंड ऑपरेशंस और सेफ्टी प्रोटोकॉल को और सख्त करने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।
